मनोज कुमार की कुछ प्रमुख फिल्में "उपकार", "शहीद", "पूरब और पश्चिम" और "रंग दे बसंती" हैं, जिनमें उन्होंने भारतीय समाज और देशभक्ति के संदेश को बड़े प्रभावी तरीके से पेश किया.
मनोज कुमार का करियर भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज है. उन्होंने न केवल एक अभिनेता के रूप में बल्कि एक निर्देशक और निर्माता के रूप में भी अपने करियर की एक अलग पहचान बनाई. उनका योगदान सिनेमा में हमेशा अविस्मरणीय रहेगा.
मनोज कुमार का बॉलीवुड करियर 1960 के दशक में शुरू हुआ था, और उन्होंने अपने अभिनय से सिनेमा की दुनिया में कदम रखा. उनकी पहली फिल्म "फेयरलेडी" थी, जो 1960 में आई थी.
हालांकि, वह अपनी पहचान फिल्म "शहीद" (1965) के साथ बनाने में सफल रहे, जिसमें उन्होंने शहीद भगत सिंह की भूमिका निभाई. इस फिल्म में उनका अभिनय दर्शकों के दिलों में बस गया, और उन्होंने भारतीय सिनेमा में एक नई दिशा दी.
मनोज कुमार को भारतीय सिनेमा में "भारत कुमार" के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि उनकी अधिकांश फिल्मों में देशभक्ति और राष्ट्रीय गौरव की भावना को प्रमुखता से दिखाया गया.
फिल्म "उपकार" (1967) और "पूरब और पश्चिम" (1970) जैसी फिल्मों में उनके द्वारा निभाए गए किरदार आज भी दर्शकों के दिलों में जिंदा हैं. इन फिल्मों ने भारतीय सिनेमा में सामाजिक मुद्दों और राष्ट्रप्रेम को उजागर किया.
मनोज कुमार ने निर्देशन की दिशा में भी कदम रखा और 1972 में "रंग दे बसंती" जैसी फिल्म बनाई, जो भारतीय समाज की गंभीर सामाजिक और राजनीतिक स्थितियों को दर्शाती थी.
इसके अलावा, उनकी "क्रांति" (1981) जैसी फिल्में भी सिनेमाघरों में हिट हुईं, जहां उन्होंने अपनी निर्देशन की अद्वितीय शैली का परिचय दिया.
मनोज कुमार ने अपने करियर में कई प्रमुख अभिनेत्रियों के साथ काम किया, जिनमें नंदा, शशि कपूर, सायरा बानो, और हेमा मालिनी जैसी स्टार्स शामिल थीं. उनका सिनेमा में योगदान आज भी नए कलाकारों के लिए प्रेरणास्त्रोत है.
उनकी फिल्मों ने भारतीय सिनेमा को न केवल मनोरंजन, बल्कि एक सामाजिक और राष्ट्रीय संदेश भी दिया, जो आज भी दर्शकों के दिलों में जीवित है.
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