तेज़ रफ़्तार कॉर्पोरेट जीवनशैली, घंटों कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठना, तनाव, अनियमित खानपान और नींद की कमी ये सभी आज के समय में ऑफिस में काम करने वाले कर्मचारियों की दिनचर्या का हिस्सा बन गए हैं. ऐसे में योग जीवन में संतुलन और ऊर्जा बनाए रखने का एक सशक्त साधन बनकर उभर रहा है. मुंबई के योगाचार्य शिव (शिवम पांडेय) का कहना है, "आज के कॉर्पोरेट जगत में कार्यभार और मानसिक दबाव इतना अधिक है कि लोग खुद के स्वास्थ्य के लिए समय नहीं निकाल पाते. रोजाना केवल 15 से 20 मिनट का योग भी उनकी शारीरिक और मानसिक स्थिति में बड़ा बदलाव ला सकता है. यह न केवल पीठ दर्द, गर्दन की जकड़न और आंखों के तनाव को कम करता है, बल्कि मन को भी शांत करता है और उत्पादकता बढ़ाता है." योगाचार्य शिव कहते हैं, "सिर्फ शरीर ही नहीं, योग आपके मन को भी शांत करता है. प्राणायाम और ध्यान, कर्मचारियों को मानसिक स्पष्टता, फोकस और भावनात्मक स्थिरता देने में मदद करते हैं. हर कार्यस्थल पर सप्ताह में कम से कम एक बार `योग ब्रेक` देना चाहिए. इससे कर्मचारियों की खुशी और दक्षता दोनों बढ़ेगी."
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