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Manoj Jarange`s Maratha Quota Protest Enters Day 3: भाजपा प्रवक्ता केशव उपाध्ये बोले– ‘मराठा आरक्षण मुद्दे पर विपक्ष सत्ता के लिए महाराष्ट्र को बना रहा बंधक’

Updated on: 31 August, 2025 09:36 AM IST | Mumbai

मुंबई के आजाद मैदान में मराठा आरक्षण की मांग को लेकर मनोज जरांगे पाटिल का अनशन तीसरे दिन भी जारी है.

X/Pics, Keshav Upadhye

X/Pics, Keshav Upadhye

मुंबई के आजाद मैदान में मराठा आरक्षण की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल का आमरण अनशन लगातार तीसरे दिन भी जारी है. अनशन स्थल पर रोजाना आंदोलनकारियों की भीड़ बढ़ती जा रही है. छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) और आजाद मैदान के बाहर भारी संख्या में मराठा समुदाय के लोग जमा हो रहे हैं, जिसके चलते पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए हैं.

मनोज जरांगे की मांग है कि मराठा समाज को केवल ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) कोटे से ही आरक्षण दिया जाए. उनका कहना है कि आधे-अधूरे समाधान और अलग से दिए गए आरक्षण से समुदाय को लाभ नहीं मिलेगा. जरांगे का तर्क है कि अगर मराठा समाज को ओबीसी श्रेणी में शामिल नहीं किया गया, तो भविष्य में रोजगार और शिक्षा में मिलने वाले आरक्षण का कोई ठोस लाभ समाज को नहीं मिलेगा.


 



 

इस बीच, भाजपा प्रवक्ता केशव उपाध्ये ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने लिखा कि महाराष्ट्र की यही दुविधा है कि मुट्ठी भर दल वोटों की राजनीति के लिए समाज को आपस में बांटने का काम कर रहे हैं. उपाध्ये ने कहा कि अंग्रेजों ने "फूट डालो और राज करो" की नीति अपनाकर भारत पर सैकड़ों वर्षों तक राज किया था और आज कुछ दल उसी नीति को दोहराते हुए राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे जानबूझकर मराठा और ओबीसी समुदाय को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा कर रहे हैं, ताकि राजनीतिक लाभ ले सकें. राजनीतिक दृष्टि से देखें तो विपक्ष भी इस आंदोलन में शामिल होते दिख रहे हैं.

वर्तमान गठबंधन सरकार ने मराठा समुदाय को 10 प्रतिशत अलग आरक्षण देने का प्रस्ताव पहले ही लागू किया है और उसी के तहत भर्ती व प्रवेश प्रक्रिया भी चल रही है. लेकिन जरांगे इस व्यवस्था को अधूरा बताते हुए ओबीसी कोटे के तहत ही आरक्षण की मांग पर अड़े हैं.

सरकार की ओर से जरांगे के साथ बातचीत की कोशिशें जारी हैं. राज्य सरकार का कहना है कि किसी भी समुदाय का आरक्षण घटाकर दूसरे को देना सामाजिक ताने-बाने को तोड़ सकता है. ऐसे में समाधान का रास्ता कानूनी और संवैधानिक तरीके से ही निकाला जाएगा.

फिलहाल, मुंबई में मराठा आंदोलन का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है और जरांगे के अनशन को लेकर राज्य की राजनीति और सामाजिक संतुलन दोनों पर असर साफ दिखाई दे रहा है.

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