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भारत में तीन अवैध बांग्लादेशी हुमायूं, इमाद, और माणिक को सजा

Updated on: 02 April, 2025 06:31 PM IST | Mumbai
Hindi Mid-day Online Correspondent | hmddigital@mid-day.com

न्यायिक मजिस्ट्रेट ने इमाद हुसैन मोहम्मद (26), हुमायूं कबीर (40) और माणिक खान (42) को को सजा सुनाई.

महाराष्ट्र में तीन अवैध अप्रवासियों के खिलाफ मामला दर्ज, एक साल की कठोर कारावास की सजा काटने के बाद उन्हें वापस भेजा जाएगा. फाइल फोटो

महाराष्ट्र में तीन अवैध अप्रवासियों के खिलाफ मामला दर्ज, एक साल की कठोर कारावास की सजा काटने के बाद उन्हें वापस भेजा जाएगा. फाइल फोटो

की हाइलाइट्स

  1. पुलिस ने दिसंबर 2024 में भोकरदन के अनवापाड़ा में छापा मारा, जहां उन्हें तीन बांग्लादेशी नागरिक अवैध रूप से रह रहे मिले.
  2. . जांच के दौरान पाया गया कि उनके पास आधार कार्ड, पैन कार्ड, एटीएम कार्ड और बैंक पासबुक सहित जाली भारतीय दस्तावेज थे.
  3. मुकदमे के दौरान दोषियों ने अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए आजीविका के उद्देश्य से भारत में प्रवेश करने की बात स्वीकार की और बांग्लादेश लौटने की इच्छा जताई.

महाराष्ट्र के जालना जिले की एक अदालत ने भारत में अवैध रूप से रहने के लिए तीन बांग्लादेशी नागरिकों को एक साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है. एक न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी आर वी पाटिल ने इमाद हुसैन मोहम्मद (26), हुमायूं कबीर (40) और माणिक खान (42) को दोषी ठहराया और सोमवार को उन्हें सजा सुनाई. 

रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने दिसंबर 2024 में भोकरदन के अनवापाड़ा में छापा मारा, जहां उन्हें तीन बांग्लादेशी नागरिक अवैध रूप से रह रहे मिले. सरकारी वकील ए एन गवली ने कहा कि तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया और विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया. तीनों लोग रोजगार की तलाश में अवैध रूप से भारत में आए थे और भोकरदन में एक स्टोन क्रशर इकाई में काम कर रहे थे. जांच के दौरान पाया गया कि उनके पास आधार कार्ड, पैन कार्ड, एटीएम कार्ड और बैंक पासबुक सहित जाली भारतीय दस्तावेज थे. जांच अधिकारी संतोष माने ने कहा कि उनके पास वैध पासपोर्ट और वीजा नहीं थे. गवली ने बताया कि पुलिस ने उनके खिलाफ पारध पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया है. 


मुकदमे के दौरान दोषियों ने अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए आजीविका के उद्देश्य से भारत में प्रवेश करने की बात स्वीकार की और बांग्लादेश लौटने की इच्छा जताई. रिपोर्ट के अनुसार बचाव पक्ष के वकील एच एच मेहता ने उनकी गरीबी और अपने मूल देश लौटने के इरादे का हवाला देते हुए नरमी बरतने की मांग की. उन्होंने अदालत से उनकी वापसी की सुविधा के लिए न्यूनतम सजा लगाने का अनुरोध किया.


दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद न्यायाधीश ने तीनों को विदेशी अधिनियम, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के तहत एक वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई और प्रत्येक पर 500 रुपये का जुर्माना लगाया. इसके अतिरिक्त, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318 सहपठित 3(5) और बीएनएसएस की धारा 264 के तहत उन्हें छह महीने के कारावास की सजा सुनाई गई. रिपोर्ट के मुताबिक बीएनएस की धारा 336 सहपठित 3(5) और बीएनएसएस की धारा 264 के तहत छह महीने की अतिरिक्त सजा सुनाई गई, साथ ही 1,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया. सभी सजाएं एक साथ चलेंगी. दोषियों ने पहले ही तीन महीने जेल में काटे हैं और उन्हें अपनी सजा के शेष नौ महीने पूरे करने होंगे. सरकारी वकील ने बताया कि उनकी सजा पूरी होने के बाद पुलिस बांग्लादेश में निर्वासन की प्रक्रिया शुरू करेगी.


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