Updated on: 03 April, 2025 10:17 AM IST | mumbai
Hindi Mid-day Online Correspondent
मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू करने का प्रस्ताव लोकसभा में पारित हो गया है. विपक्ष के कुछ दलों, जैसे शिवसेना (ठाकरे गुट) और एनसीपी (शरद पवार गुट) ने भी इसका समर्थन किया.
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मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू करने के प्रस्ताव को लोकसभा में आम सहमति मिल गई है. इस प्रस्ताव को देर रात 1:59 बजे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सदन में पेश किया. इस पर चर्चा के बाद लोकसभा ने प्रस्ताव को पारित कर दिया. सरकार का कहना है कि मणिपुर में पिछले कुछ महीनों से हालात में सुधार हुआ है, लेकिन अब भी राज्य में संवेदनशीलता बनी हुई है, जिसे देखते हुए राष्ट्रपति शासन आवश्यक हो गया है.
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लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “मैं यह नहीं कहूंगा कि मणिपुर में स्थिति पूरी तरह से संतोषजनक है, लेकिन यह अब नियंत्रण में है. पिछले चार महीनों से कोई हिंसा की घटना सामने नहीं आई है.” उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि राज्य में शांति बहाल हो और लोगों का विश्वास दोबारा कायम किया जाए.
#WATCH | Union Home Minister Amit Shah moves statutory resolution regarding President`s Rule in Manipur, in Lok Sabha
— ANI (@ANI) April 2, 2025
Speaking over the same, Union Home Minister Amit Shah says, "For the past four months, there has been no violence in Manipur...I will not say the situation in… pic.twitter.com/yHdiEM9GJO
शाह ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी के पास अब इतने सांसद भी नहीं हैं कि वह सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला सके. उन्होंने कहा, “जो दल खुद कमजोर स्थिति में हैं, वो सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन जनता ने भाजपा को मजबूत जनादेश दिया है.”
इस प्रस्ताव का समर्थन न केवल सत्तापक्ष ने किया, बल्कि विपक्ष के कुछ दलों ने भी इस पर सहमति जताई. शिवसेना (ठाकरे गुट) ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया, वहीं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले ने भी राष्ट्रपति शासन लगाने के पक्ष में अपनी बात रखी.
सुप्रिया सुले ने कहा, “हम मणिपुर के लोगों के साथ हैं और चाहते हैं कि वहां जल्द से जल्द स्थिरता और शांति लौटे. अगर इसके लिए राष्ट्रपति शासन जरूरी है, तो हम उसका समर्थन करते हैं.”
चर्चा के दौरान अन्य विपक्षी दलों ने भी अपनी राय रखी, लेकिन बहुमत के साथ यह प्रस्ताव पारित हो गया. अब यह राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद आधिकारिक रूप से लागू होगा.
मणिपुर में लंबे समय से जातीय संघर्ष और हिंसा की स्थिति बनी हुई थी. केंद्र सरकार ने पहले कई प्रयास किए, लेकिन हालात में अपेक्षित सुधार न होने के कारण यह कदम उठाया गया है. सरकार का कहना है कि राष्ट्रपति शासन के दौरान प्रशासनिक नियंत्रण बेहतर तरीके से हो सकेगा और शांति बहाली की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा.
अब सबकी नजरें इस बात पर होंगी कि केंद्र सरकार मणिपुर में राष्ट्रपति शासन के तहत किस तरह से हालात को सामान्य करती है और वहां लोकतंत्र को फिर से सक्रिय करने की दिशा में कब कदम बढ़ाएगी.
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