Updated on: 29 August, 2025 12:21 PM IST | Mumbai
‘परम सुंदरी’ एक सिंपल लेकिन दिल छू लेने वाली लव स्टोरी है, जिसमें जान्हवी कपूर और सिद्धार्थ की प्यारी केमिस्ट्री दर्शकों को असली मोहब्बत का एहसास कराती है. बिना दिखावे और शोर-शराबे के बनी यह फिल्म अपने जादू से सीधी दिल में उतर जाती है.
जाह्नवी और सिद्धार्थ की जोड़ी एक ताज़गी लेकर आती है. उनके बीच का टकराव, फिर धीरे-धीरे बढ़ती समझ और फिर गहराता रिश्ता, सब कुछ बेहद सहज और दिल को छू लेने वाला है.
इस वीकेंड ऑडियंस के लिए एक बेहद ही सिंपल और प्यारी लव स्टोरी मैडॉक फिल्म्स की टीम लेकर आयी है. कुछ फिल्में होती हैं जो न शोर मचाती हैं, न दिखावे करती हैं — बस धीरे से आपके दिल में उतर जाती हैं. परम सुंदरी उन्हीं फिल्मों में से एक है. यह फिल्म न सिर्फ एक प्यारी लव स्टोरी दिखाती है, बल्कि यह भी याद दिलाती है कि असली प्यार प्लान नहीं किया जाता — वो तो बस हो जाता है.इस डिजिटल वर्ल्ड में जहां सब कुछ डिजिटल होता जा रहा है लेकिन प्यार के लिए अभी भी एहसास की जरूरत है.
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निर्देशक – तुषार जलोटा
कलाकार – सिद्धार्थ मल्होत्रा, जान्हवी कपूर, रेंजी पणिक्कर, सिद्धार्थ शंकर, मंजीत सिंह, संजय कपूर, इनायत वर्मा
समय अवधि – 136 मिनट
रेटिंग – 3.5 स्टार्स
कहानी है परम (सिद्धार्थ मल्होत्रा) की, जो तकनीक में डूबा एक स्मार्ट और बहुत पैसे वाला बिजनेसमैन है. वह एक ऐसी एप में पैसे लगाना चाहता है जिसके माध्यम से डेटा और एल्गोरिदम से आपको आपका सकता हैं. ऐसे में उसका पिता यानि की संजय कपूर उसको कहता है कि वह अपनी इस एप के माध्यम से एक महीने में सोल मेट ढूंढ कर लाये. किस्मत का खेल कुछ और ही होता है — और उसकी मुलाकात होती है सुंदरी (जान्हवी कपूर) से, जो जमीन से जुड़ी, सादा सोच रखने वाली लड़की है.उन दोनों की दुनिया एक-दूसरे से बिल्कुल अलग है, पर जब ये दोनों मिलते हैं तो कैसे इनकी दुनिया भी मिल जाती है -यही इस फिल्म की जान है.
जाह्नवी और सिद्धार्थ की जोड़ी एक ताज़गी लेकर आती है. उनके बीच का टकराव, फिर धीरे-धीरे बढ़ती समझ और फिर गहराता रिश्ता — सब कुछ बेहद सहज और दिल को छू लेने वाला है. न ओवर एक्टिंग, न जबरदस्ती का रोमांस .
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सिद्धार्थ मल्होत्रा ने परम के किरदार को बहुत ही स्वाभाविक ढंग से निभाया है. उनके अंदाज में एक आत्मविश्वास है, जो किरदार को स्टाइलिश भी बनाता है और रिलेटेबल भी.जान्हवी कपूर इस फिल्म की जान हैं. उनका अभिनय एकदम नैचुरल है — न ज़रूरत से ज़्यादा ड्रामा, न बनावटी मासूमियत. उनकी आँखों में जो सच्चाई है, वो स्क्रीन पर सीधे दिल तक पहुंचती है.
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संजय कपूर ने पिता के किरदार को मज़ाकिया अंदाज़ में निभाया है, लेकिन उनका रोल फिल्म को गहराई भी देता है. उनका हास्य और भावनात्मक संतुलन काबिल-ए-तारीफ है. मनजोत सिंह और इनायत वर्मा जैसे कलाकारों ने भी फिल्म में अपनी मौजूदगी से रंग भर दिए हैं.
फिल्म का म्यूज़िक इसकी जान है. हर गाना कहानी में एक नया रंग जोड़ता है. चाहे वो रोमांस हो, हल्की-फुल्की मस्ती या गहरा इमोशन — हर ट्रैक अपने आप में खास है. और अच्छी बात ये है कि ऑडियंस इन गानों को पहले ही दिल से अपना चुकी है.
तुषार जलोटा का निर्देशन बहुत ही सधा हुआ है. फिल्म कहीं भी ज़रूरत से ज़्यादा भारी नहीं होती, और न ही कहीं बोर करती है. दिल्ली की चमक और केरल की शांति — दोनों को जिस तरह से स्क्रीन पर दिखाया गया है, वो आँखों को बहुत सुकून देता है.
कहानी भले ही सिंपल हो, लेकिन उसमें एक गहराई छिपी है जो दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है. फिल्म के किरदार पूरी तरह से असली लगते हैं. संगीत और लोकेशन्स इस फिल्म को एक अलग ही स्तर पर ले जाते हैं; हर सीन विज़ुअली खूबसूरत है और म्यूज़िक भावनाओं को और असरदार बनाता है. लेकिन सबसे खास बात यह है कि यह फिल्म आज की पीढ़ी की उलझनों को बखूबी समझती है और उन्हें बिना बोझिल बनाए, हल्के-फुल्के और सधे हुए अंदाज़ में दर्शाती है.
दिनेश विजान द्वारा निर्मित और मैडॉक फिल्म्स के बैनर तले बनी परम सुंदरी एक ऐसी फिल्म है जो आपको मुस्कुराना, महसूस करना और सोचने पर मजबूर करती है. यह उन लोगों के लिए है जो लव स्टोरी में सिर्फ ग्लैमर नहीं, सच्चाई भी ढूंढते हैं.
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