दूसरे दिन आंदोलन की तस्वीरों में समर्थकों का यह रूप देखकर साफ है कि बड़ी संख्या में लोग न सिर्फ आंदोलन का हिस्सा बन रहे हैं. (Pic/Ashish Raje, Shivsena UBT Communication)
बल्कि दिन-रात जरांगे पाटिल के साथ खड़े रहने का संकल्प भी दोहरा रहे हैं. आंदोलनकारियों में बड़ी संख्या में महिलाएं, युवा और ग्रामीण इलाकों से आए लोग शामिल हैं.
पुलिस ने आंदोलन को नियंत्रित रखने के लिए पहले ही दिशा-निर्देश जारी किए हैं. बुधवार को मुंबई पुलिस ने मनोज जरांगे पाटिल और उनके समर्थकों को सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक रैली निकालने की अनुमति दी थी.
इस दौरान साफ तौर पर कहा गया था कि रैली में 5,000 से अधिक लोग शामिल नहीं हो सकते. बावजूद इसके, आज़ाद मैदान और उसके आसपास समर्थकों का हुजूम उमड़ पड़ा.
जरांगे पाटिल ने आंदोलन स्थल पर कहा कि जब तक मराठा समाज को ओबीसी कोटे के तहत आरक्षण नहीं दिया जाता, वे अपना आमरण अनशन जारी रखेंगे.
उनका कहना है कि सरकार द्वारा दिए गए 10 प्रतिशत अलग आरक्षण से मराठा समाज को वास्तविक लाभ नहीं मिलेगा. यही वजह है कि उनकी मांग केवल ओबीसी आरक्षण में शामिल किए जाने की है.
आज़ाद मैदान में जुटे समर्थकों का कहना है कि वे अपने नेता की हर परिस्थिति में मदद करेंगे.
यही कारण है कि आंदोलनकारियों ने मैदान के बाहर सड़कों पर ही भोजन किया और पूरे माहौल को एक सामूहिक संघर्ष का रूप दे दिया.
फिलहाल, राज्य सरकार की ओर से बातचीत की कोशिशें जारी हैं. लेकिन मैदान में बैठी भीड़ और समर्थकों की संख्या को देखकर यह स्पष्ट है कि जरांगे पाटिल का यह आंदोलन आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है.
ADVERTISEMENT