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भारतवर्ष के सबसे बड़े त्योहार दिवाली 2026 की तैयारी में व्यापारी वर्ग के लिए 26 जरूरी बातें

Updated on: 28 September, 2026 04:03 PM IST | Mumbai
Bespoke Stories Studio | bespokestories@mid-day.com

दिवाली 2026 के लिए कपड़ा कारोबारियों की खरीद, स्टॉक, पूंजी, भुगतान और बिक्री तैयारी पर 26 सुझाव।

केसरिया टेक्सटाइल के CEO श्री रितेश मोदी के सटीक सुझाव.

केसरिया टेक्सटाइल के CEO श्री रितेश मोदी के सटीक सुझाव.

दिवाली इस बार 8 नवंबर को है। पिछले साल के मुकाबले दिवाली देर से आने के कारण कपड़ा कारोबारियों के सामने इस बार त्योहारी खरीद-बिक्री की तैयारी को लेकर अलग तरह की चुनौती रहेगी। कपड़ा निर्माता, थोक व्यापारी और रिटेल कारोबारी यदि समय रहते माल की खरीद, उत्पादन, स्टॉक, भुगतान और पूंजी की व्यवस्था कर लें, तो त्योहारी सीजन में बेहतर तरीके से कारोबार किया जा सकता है।


केसरिया टेक्सटाइल के CEO रितेश मोदी ने व्यापारियों के लिए दिवाली 2026 को लेकर 26 महत्वपूर्ण सुझाव जारी किए हैं। इन सुझावों में खरीदारी से लेकर स्टॉक, पूंजी, भुगतान, दुकान की व्यवस्था, ग्राहकों की मांग और डिजिटल माध्यमों तक कारोबार से जुड़े जरूरी पहलुओं को शामिल किया गया है।

रितेश मोदी के अनुसार इस बार हिंदू पंचांग में अधिक मास के कारण त्योहार सामान्य समय से कुछ आगे खिसक गए हैं। नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू होगी, दशहरा 20 अक्टूबर को, धनतेरस 6 नवंबर को, दिवाली 8 नवंबर को और भाई दूज 11 नवंबर को होगा। ऐसे में व्यापारियों को अक्टूबर में तैयारी शुरू करने के बजाय अगस्त और सितंबर से ही अपनी योजना बना लेनी चाहिए।


रितेश मोदी ने कहा, “त्योहारी सीजन अपने आप में चुनौती नहीं है, असली बात उसकी तैयारी है। व्यापारी अगस्त और सितंबर में ही माल की खरीद, उत्पादन और स्टॉक की योजना बना लें तो दिवाली के समय अनावश्यक दबाव से बच सकते हैं।”

कपड़ा कारोबार में त्योहारी सीजन के लिए केवल ज्यादा माल रखना ही पर्याप्त नहीं है। कौन-सा माल कितना रखना है, कब मंगाना है और जरूरत पड़ने पर कितनी जल्दी दोबारा मंगाया जा सकता है, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है। रितेश मोदी का कहना है कि व्यापारियों को पूरी पूंजी एक साथ माल में लगाने के बजाय खरीदारी को अलग-अलग चरणों में बांटना चाहिए।

इससे शुरुआत में ग्राहकों की पसंद का अंदाजा लगाया जा सकेगा और जो माल तेजी से बिक रहा है, उसे समय रहते दोबारा मंगाया जा सकेगा। वहीं धीमी बिक्री वाले माल में जरूरत से ज्यादा पैसा फंसने का जोखिम भी कम होगा।

रितेश मोदी ने यह भी सुझाव दिया है कि व्यापारियों को दिवाली के साथ-साथ नवंबर और दिसंबर में आने वाले शादी के सीजन को भी ध्यान में रखना चाहिए। शादी की खरीदारी और दिवाली की खरीदारी एक जैसी नहीं होती। ग्राहक की पसंद, बजट और कपड़ों की जरूरत अलग हो सकती है। इसलिए दिवाली के बचे हुए माल को ही शादी के सीजन में खपाने के बजाय शादी के लिए अलग से माल की योजना बनाना अधिक उपयोगी हो सकता है।

माल के साथ पूंजी का भी रखें ध्यान

त्योहारी सीजन में बिक्री बढ़ती है, लेकिन बिक्री बढ़ने का मतलब यह नहीं कि पैसा तुरंत हाथ में भी आ जाएगा। व्यापारी को माल खरीदने और उसका भुगतान करने से लेकर ग्राहक से पैसा मिलने तक का अंतर ध्यान में रखना चाहिए।

रितेश मोदी के अनुसार व्यापारियों को सप्ताह के हिसाब से आने-जाने वाले पैसे की योजना बनानी चाहिए। नवरात्रि शुरू होने से पहले ही ग्राहकों की उधारी और भुगतान की सीमा स्पष्ट कर लेना बेहतर होगा।

उन्होंने कहा, “बिक्री का आंकड़ा अच्छा होना और हाथ में पैसा होना दो अलग बातें हैं। माल का भुगतान पहले करना पड़ सकता है और उसका पैसा बाद में वापस आता है। इसलिए त्योहारी कारोबार में बिक्री के साथ पूंजी का प्रबंधन भी जरूरी है।”

रिटर्न, एक्सचेंज और उधारी से जुड़े नियम भी पहले से स्पष्ट रखने चाहिए, ताकि सीजन के दौरान व्यापारी और ग्राहक दोनों के लिए स्थिति साफ रहे।

कीमत तय करते समय लागत पर रखें नजर

त्योहारी सीजन में कीमत तय करते समय व्यापारियों को अपनी मौजूदा लागत का ध्यान रखना चाहिए। पुराने लागत भाव के आधार पर कीमत तय करने के बजाय कच्चे माल, उत्पादन, परिवहन और अन्य खर्चों को ध्यान में रखकर नई लागत निकालना जरूरी है।

GST से जुड़े नियमों और कीमत की लागू सीमाओं को भी ध्यान में रखना होगा। मैन-मेड फाइबर और यार्न की लागत में बदलाव का असर तैयार कपड़ों की लागत पर पड़ सकता है। ऐसे में व्यापारियों को अपनी लागत और खरीद के दस्तावेज व्यवस्थित रखने चाहिए।

दुकान की तैयारी भी उतनी ही जरूरी

दिवाली के दिनों में ग्राहक दुकान पर केवल माल देखने नहीं आता, वह जल्दी खरीदारी भी करना चाहता है। इसलिए दुकान में पर्याप्त स्टाफ, सही साइज की तुरंत उपलब्धता, ट्रायल रूम की व्यवस्था और तेज बिलिंग जरूरी है।

रितेश मोदी का कहना है कि सितंबर की शुरुआत तक अतिरिक्त स्टाफ की भर्ती और ट्रेनिंग पूरी कर लेना बेहतर रहेगा। दुकान की सजावट और माल की प्रस्तुति को भी नवरात्रि से दिवाली तक ग्राहकों की बदलती पसंद के अनुसार बदला जा सकता है।

अब ग्राहक पहले मोबाइल पर आता है

आज कपड़ा कारोबार में ग्राहक का पहला संपर्क कई बार दुकान पर नहीं, बल्कि मोबाइल पर होता है। WhatsApp पर नए माल की जानकारी, अच्छे फोटो और वीडियो, Google Business Profile पर सही जानकारी और स्थानीय भाषा में डिजिटल कंटेंट ग्राहकों तक पहुंच बनाने में मदद कर सकते हैं।

रितेश मोदी ने व्यापारियों को टियर-2 और टियर-3 शहरों से बढ़ती मांग पर भी ध्यान देने की सलाह दी है। साथ ही ई-कॉमर्स और ऑनलाइन मार्केटप्लेस के त्योहारी अभियान की योजना पहले से बनाने और हर सप्ताह बिक्री की स्थिति देखने की बात कही है।

रितेश मोदी ने कहा, “व्यापारी को यह इंतजार नहीं करना चाहिए कि दिवाली खत्म होने के बाद बैठकर हिसाब करेंगे कि क्या बिका और क्या नहीं बिका। हर सप्ताह यह देखना जरूरी है कि कौन-सा माल चल रहा है और किस माल में पैसा अटका हुआ है। उसी हिसाब से अगली खरीद का फैसला करना चाहिए।”

अंततः दिवाली का कारोबार केवल त्योहार आने पर दुकान खोलकर बिक्री करने का विषय नहीं है। इसके लिए कई सप्ताह पहले से माल, पैसा, खरीद, बिक्री, स्टाफ और ग्राहक की मांग—हर पहलू की तैयारी करनी होती है।

रितेश मोदी के अनुसार, “दिवाली के समय जो ग्राहक दुकान पर आता है, उस समय तक व्यापारी के कई बड़े फैसले हो चुके होते हैं। समय से पहले की गई तैयारी ही काफी हद तक तय करती है कि दिवाली का कारोबार कितना व्यवस्थित रहेगा।”

केसरिया टेक्सटाइल की ओर से जारी यह 26 सूत्रीय मार्गदर्शन कपड़ा निर्माताओं, थोक व्यापारियों और रिटेल कारोबारियों को दिवाली 2026 के लिए समय रहते अपनी व्यापारिक तैयारी करने और बदलती बाजार परिस्थितियों के अनुसार फैसले लेने में मदद करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

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