Updated on: 14 November, 2025 04:55 PM IST | Mumbai
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India Hood: दो युवाओं की बिना फंडिंग शुरू हुई पहल, जो आज 50 लाख मासिक पाठकों के साथ भारत का भरोसेमंद डिजिटल न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म है।
India Hood
पश्चिम बंगाल के एक छोटे से गाँव में बैठे दो युवाओं ने शायद कभी नहीं सोचा था कि उनकी एक साधारण-सी सोच एक दिन लाखों लोगों की पहचान बन जाएगी। फरवरी 2022 की एक दोपहर, Krishna Chandra Garain और Koushik Dutta ने सिर्फ़ एक लैपटॉप और सीमित इंटरनेट कनेक्शन के साथ शुरुआत की।
मकसद था सीधा – खबरों को जनता के और करीब लाना, उन लोगों तक जो रोजमर्रा की जिंदगी में बड़ी मीडिया की सुर्खियों से कटे रहते हैं।
तीन साल बाद, वही सोच आज India Hood के नाम से डिजिटल मीडिया जगत में अपनी अलग जगह बना चुकी है। बिना किसी निवेशक, बिना किसी भारी फंडिंग के – सिर्फ़ मेहनत, ईमानदारी और तकनीकी समझ के दम पर बनी इस टीम ने दिखा दिया कि कंटेंट अगर दिल से हो, तो लोगों तक ज़रूर पहुँचता है।
आज India Hood के 50 लाख से ज्यादा मासिक रीडर्स हैं, और 10 लाख से अधिक सब्सक्राइबर इसके पुश नोटिफिकेशन, ईमेल और व्हाट्सऐप चैनलों से जुड़े हैं।
जहां दूसरे प्लेटफ़ॉर्म विज्ञापन और मार्केटिंग पर करोड़ों खर्च करते हैं, वहीं India Hood ने अपनी पहचान बनाई सिर्फ़ ऑर्गेनिक ग्रोथ और भरोसे से।
इस सफर में अब यह प्लेटफ़ॉर्म Hoodgen Pvt. Ltd. कंपनी के रूप में दर्ज हो चुका है, और करीब 20 लोगों की युवा टीम इसे संभाल रही है-हर कोई अपने क्षेत्र का एक्सपर्ट, लेकिन मिशन एक ही: सच्ची और ज़मीनी पत्रकारिता।
इंडिया हुड ने शुरू से ही यह समझ लिया था कि भारत एक भाषा में नहीं बोलता।
इसीलिए इसके दो अलग-अलग प्लेटफ़ॉर्म हैं।
Indiahood.in (बंगाली) – यहाँ पर मिलती हैं स्थानीय खबरें, मौसम अपडेट, सरकारी योजनाएँ, राशिफल, Gold Price और सांस्कृतिक खबरें।
Indiahood.com (अंग्रेज़ी) – स्टार्टअप्स, बिज़नेस, अर्थव्यवस्था और डिजिटल इंडिया से जुड़ी गहराई वाली रिपोर्ट्स।
दोनों ही साइट्स का लक्ष्य साफ़ है - सूचना को सरल, सटीक और सुलभ बनाना।
कौशिक दत्ता कहते हैं, “हमने कभी यह नहीं सोचा कि फंडिंग आएगी तो करेंगे। हमने बस सोचा-अगर लोग हमें पढ़ेंगे, तो वही सबसे बड़ी फंडिंग होगी।”
कृष्ण चंद्र गराई जोड़ते हैं, “हर खबर ट्रेंडिंग नहीं होती, लेकिन हर ट्रेंड के पीछे कोई असली कहानी जरूर होती है। हम वही कहानियाँ बताते हैं।”
India Hood बिना फंडिंग के पूरी तरह ऑर्गेनिक प्लेटफ़ॉर्म के रूप में खड़ा है। यहाँ लोकल जर्नलिज्म पर फोकस किया जाता है, जो लोगों की असली समस्याओं से जुड़ा है।
कंटेंट टेक्नोलॉजी और डेटा स्ट्रेटजी के साथ तैयार किया जाता है ताकि हर खबर सही ऑडियंस तक पहुँचे।
और सबसे अहम बात, इस प्लेटफ़ॉर्म की ग्रोथ किसी पेड ट्रैफ़िक से नहीं, बल्कि लोगों के भरोसे से बनी है।
जहां कई डिजिटल न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म सिर्फ़ क्लिकबेट हेडलाइन पर टिके हैं, वहीं India Hood ने ये साबित किया है कि गुणवत्ता, न कि मात्रा, ही सफलता की असली कुंजी है।
आज बंगाल से लेकर दिल्ली और असम तक, लोग इंडिया हुड के ऐप, वेबसाइट और ईमेल अलर्ट्स से जुड़कर खबरें पढ़ते हैं-वो खबरें जो उनकी ज़िंदगी से जुड़ी हैं।
India Hood सिर्फ़ एक मीडिया ब्रांड नहीं, बल्कि एक प्रेरणा है। ये दिखाता है कि आज के डिजिटल युग में अगर आपके पास सच्चा विज़न और कड़ी मेहनत करने की हिम्मत है, तो किसी फंडिंग या बड़े नेटवर्क की ज़रूरत नहीं।
दो दोस्तों की यह यात्रा अब सैकड़ों युवाओं को यह विश्वास दिला रही है कि इंटरनेट सिर्फ़ मनोरंजन का नहीं, बदलाव का भी माध्यम हो सकता है।
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