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अयोध्या में राष्ट्र कथा - Day 7, बृज भूषण शरण सिंह जी के जन्मदिवस ने बनाया दिन को विशेष

Updated on: 08 January, 2026 07:55 PM IST | Mumbai
Bespoke Stories Studio | bespokestories@mid-day.com

अयोध्या में दिव्य राष्ट्र कथा महोत्सव का समापन, बृज भूषण शरण सिंह ने जन्मदिन राष्ट्र चेतना को समर्पित किया।

अयोध्या राष्ट्र कथा

अयोध्या राष्ट्र कथा

अयोध्या के प्रक्षेत्र नंदिनी निकेतन में चल रहा दिव्य राष्ट्र कथा महोत्सव आज, 8 जनवरी को अपने अंतिम दिवस में प्रवेश कर गया है। सात दिनों तक चली इस आध्यात्मिक और वैचारिक यात्रा का समापन आज सायंकाल प्रस्तावित है। आज का दिन आयोजन के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि राष्ट्र कथा के आयोजक बृज भूषण शरण सिंह जी का जन्मदिवस भी आज ही है।


बताया जाता है कि बृज भूषण शरण सिंह जी ने इस वर्ष अपने जन्मदिन को किसी व्यक्तिगत उत्सव के रूप में न मनाते हुए, राष्ट्र और समाज के लिए समर्पित एक वैचारिक आयोजन के रूप में राष्ट्र कथा को समर्पित करने का निर्णय लिया। इसी संकल्प के तहत 1 जनवरी से इस ऐतिहासिक कथा का आयोजन प्रारंभ हुआ, जो आज अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है।

राष्ट्र कथा के पहले दिन का वातावरण अत्यंत भावनात्मक रहा। उद्घाटन सत्र के दौरान बृज भूषण शरण सिंह जी की भावुक उपस्थिति ने यह संकेत दिया कि यह आयोजन उनके लिए केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक वैचारिक उत्तरदायित्व है। इसके बाद पूरे सात दिनों तक कथा पूरी अनुशासन और गरिमा के साथ आगे बढ़ती रही।


पूरे महोत्सव में परम पूज्य सद्गुरु श्री रितेश्वर महाराज ने राम कथा का प्रवचन किया। उनके वचनों में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंगों के माध्यम से राष्ट्र चेतना, सामाजिक संतुलन, नेतृत्व, त्याग और कर्तव्य जैसे विषयों को वर्तमान समय से जोड़ा गया। अंतिम दिन की कथा में इन सभी विचारों का समेकित स्वरूप श्रोताओं के सामने प्रस्तुत हो रहा है।

इस राष्ट्र कथा महोत्सव के दौरान कई विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति भी देखने को मिली। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा सहित अनेक जनप्रतिनिधि और सामाजिक व्यक्तित्व विभिन्न सत्रों में उपस्थित रहे। आयोजकों के अनुसार, इन सभी की सहभागिता ने आयोजन को व्यापक सामाजिक समर्थन प्रदान किया।

आयोजन के दौरान बृज भूषण शरण सिंह जी के पुत्र प्रतीक भूषण सिंह और करण भूषण सिंह की सक्रिय उपस्थिति भी लगातार बनी रही। इसे सामाजिक उत्तरदायित्व की पीढ़ीगत निरंतरता के रूप में देखा जा रहा है।

विशेष बात यह रही कि जन्मदिवस होने के बावजूद किसी प्रकार का औपचारिक उत्सव या समारोह आयोजित नहीं किया गया। पूरा दिन राम कथा, साधना और आत्मचिंतन को समर्पित रहा। आयोजकों का कहना है कि यह जन्मदिन सेवा और विचार के भाव के साथ मनाया गया, न कि उत्सव के रूप में।

अंतिम दिन पर आयोजन समिति ने सद्गुरु श्री रितेश्वर महाराज, सभी अतिथियों, स्वयंसेवकों और हजारों की संख्या में पहुंचे श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया है, जिनके सहयोग से यह राष्ट्र कथा अपने उद्देश्य तक पहुंच पाई।

फिलहाल राम कथा का अंतिम प्रवाह जारी है और सायंकाल विधिवत समापन किया जाएगा। अयोध्या में आयोजित यह राष्ट्र कथा सात दिनों तक चली एक ऐसी वैचारिक साधना के रूप में स्मरण की जाएगी, जिसने धर्म, संस्कृति और राष्ट्रबोध को एक सूत्र में पिरोया।

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