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राष्ट्रकथा के माध्यम से सामाजिक संवाद: बृज भूषण शरण सिंह जी के सान्निध्य में अयोध्या में भव्य आयोजन

Updated on: 02 January, 2026 07:43 PM IST | Mumbai
Bespoke Stories Studio | bespokestories@mid-day.com

रामकथा को राष्ट्रीय, सांस्कृतिक और सामाजिक प्रतिबिंब के साथ मिश्रित करते हुए, अयोध्या में राष्ट्रकथा महोत्सव शुरू हुआ।

राष्ट्रकथा महोत्सव

राष्ट्रकथा महोत्सव

अयोध्या में नए वर्ष की शुरुआत के साथ एक भावनात्मक और वैचारिक वातावरण देखने को मिला, जब दिव्य ऐतिहासिक राष्ट्रकथा महोत्सव ने औपचारिक उद्घाटन के बाद अपने मुख्य विमर्श चरण में प्रवेश किया। रामकथा के प्रथम दिन की शुरुआत ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्र, समाज और व्यक्ति के उत्थान से जुड़ा एक व्यापक विचार-मंच है। इस संपूर्ण आयोजन की रूपरेखा और संचालन Brij Bhushan Sharan Singh के मार्गदर्शन में किया जा रहा है।


राष्ट्रकथा का मूल विचार “बांके बिहारी से अवध बिहारी तक” की यात्रा पर आधारित है, जिसे व्यक्तिगत भक्ति से सामाजिक उत्तरदायित्व की ओर बढ़ते जीवन-दर्शन के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। उद्घाटन के दौरान एक भावनात्मक क्षण भी देखने को मिला, जब बृज भूषण शरण सिंह जी मंच पर राष्ट्रकथा की संकल्पना और उसके उद्देश्य पर बात करते हुए भावुक होते नजर आए। उपस्थित श्रद्धालुओं और अतिथियों के अनुसार, यह भावुकता आयोजन के प्रति उनके गहरे जुड़ाव और भावनात्मक प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उद्घाटन के पश्चात रामकथा का आरंभ होते ही आयोजन का स्वर औपचारिकता से हटकर विचार, आत्मचिंतन और अनुशासन की दिशा में स्पष्ट रूप से केंद्रित हो गया।

आयोजकों के अनुसार, बृज भूषण शरण सिंह जी की भूमिका इस महोत्सव में केवल संरक्षक की नहीं, बल्कि संतुलन और दिशा प्रदान करने वाली रही है। उनकी उपस्थिति से आयोजन को एक सुव्यवस्थित ढांचा मिला है, जिसमें समयबद्धता, अनुशासन और उद्देश्य की स्पष्टता दिखाई देती है। कार्यक्रम को किसी व्यक्तिगत छवि के बजाय सांस्कृतिक और सामाजिक सरोकारों से जोड़े रखने का प्रयास किया गया है, जिससे यह आयोजन समाचार और समाज - दोनों के लिए प्रासंगिक बन सका है।


इस अवसर पर Prateek Bhushan Singh और Karan Bhushan Singh की उपस्थिति भी उल्लेखनीय रही। दोनों ने पूरे कार्यक्रम के दौरान सादगीपूर्ण सहभागिता निभाई और श्रद्धालुओं व आयोजकों से संवाद करते नजर आए। उनकी मौजूदगी ने आयोजन को सामूहिक सहभागिता और निरंतर समर्थन का स्वरूप प्रदान किया।

रामकथा का वाचन Param Pujya Sadhguru Shri Riteshwar Maharaj द्वारा किया जा रहा है। प्रथम दिन की कथा में उन्होंने रामकथा को केवल पौराणिक आख्यान नहीं, बल्कि जीवन में मर्यादा, कर्तव्य और संतुलन की व्यावहारिक शिक्षा के रूप में प्रस्तुत किया। उनकी वाणी में शास्त्रीय संदर्भों के साथ वर्तमान सामाजिक चुनौतियों का संतुलित उल्लेख देखने को मिला, जिससे कथा श्रोताओं के लिए अधिक प्रासंगिक बन सकी।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पहले दिन का पूरा वातावरण शांत और विचारप्रधान रहा। मंचीय औपचारिकताएं सीमित रखी गईं और श्रोताओं का ध्यान पूरी तरह कथा और उसके भावार्थ पर केंद्रित रहा। आयोजकों ने बताया कि आने वाले दिनों में रामकथा के साथ हनुमंत कथा, कृष्ण कथा और व्यापक सनातन दृष्टिकोण को क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि विचारों की गहराई स्वाभाविक रूप से विकसित हो सके।

इस महोत्सव की अवधि में दो महत्वपूर्ण तिथियां भी स्वाभाविक रूप से जुड़ रही हैं। 5 जनवरी, जो परम पूज्य साधगुरु श्री ऋतेश्वर महाराज का जन्मदिवस है, आयोजन की समय-सीमा में ही आता है। इसे किसी औपचारिक उत्सव के बजाय साधना और विचार के माध्यम से स्मरण किया जाएगा। वहीं 8 जनवरी, बृज भूषण शरण सिंह जी का जन्मदिवस, आयोजन के अंतिम चरण से जुड़ता है, जो पूरे महोत्सव को एक भावनात्मक पूर्णता प्रदान करता है।

आयोजन स्थल Prakshetra Nandini Niketan को बहु-दिवसीय कथा के लिए सादगी, अनुशासन और सुव्यवस्था के साथ तैयार किया गया है। पारंपरिक वातावरण को बनाए रखते हुए आधुनिक प्रबंधन, सुरक्षा और दर्शक व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया है।

रामकथा की पवित्र भूमि Ayodhya में आयोजित यह राष्ट्रकथा महोत्सव, अतीत की सांस्कृतिक विरासत को वर्तमान के वैचारिक संवाद से जोड़ता हुआ आगे बढ़ रहा है। रामकथा के पहले दिन के साथ ही यह संकेत स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में यह आयोजन आध्यात्मिक के साथ-साथ सामाजिक चेतना का भी एक सशक्त मंच बनेगा।

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