Updated on: 20 May, 2026 05:38 PM IST | Mumbai
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जीएसटी हटने के बाद टर्म इंश्योरेंस हुआ सस्ता। जानें सही कवच, फायदे और सही पॉलिसी चुनने के तरीके।
टर्म इंश्योरेंस.
टर्म इंश्योरेंस वो छोटा सा कदम है जो आपके परिवार के बड़े सपनों को सुरक्षा देता है। बहुत कम प्रीमियम में आप अपने परिवार को इतनी बड़ी सुरक्षा दे सकते हैं कि किसी भी मुश्किल वक्त में उनकी ज़िंदगी रुके नहीं। और अब अच्छी ख़बर यह है कि सरकार ने हाल ही में 18% जीएसटी हटाकर इसे पहले से कहीं ज़्यादा किफ़ायती बना दिया है।
तो अगर आपने अब तक टर्म इंश्योरेंस नहीं लिया है, तो यह सही समय है इसके बारे में गंभीरता से सोचने का। इस लेख में हम समझेंगे कि जीएसटी छूट से असल में कितना फर्क पड़ेगा, टर्म इंश्योरेंस कैसे काम करता है, कितना कवच लेना चाहिए, और कंपनी चुनते समय किन बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है।
सितंबर 2025 में सरकार ने एक ऐसा फैसला किया जो सीधे आपकी जेब पर असर डालता है। पहले टर्म इंश्योरेंस के हर प्रीमियम भुगतान पर 18% जीएसटी देना पड़ता था। अब वो पूरी तरह से हटा दिया गया है। मतलब अब प्रीमियम पर कोई अलग से जीएसटी नहीं देना होगा, जिससे आपकी कुल लागत कम हो जाएगी।
इस फ़ैसले का आप पर क्या असर होगा, इसे एक सीधे उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए आपका सालाना प्रीमियम भुगतान ₹20,000 है। पहले ₹3,600 अलग से जीएसटी देना पड़ता था, यानी कुल ₹23,600। लेकिन नए नियम लागू होने के बाद आपको सिर्फ ₹20,000 देने होंगे। अब अगर आपकी योजना 30 साल की है, तो हिसाब लगाइए, कुल बचत ₹1 लाख से भी ज़्यादा होगी। एक छोटी सी बात याद रखें, यह छूट सिर्फ व्यक्तिगत टर्म इंश्योरेंस पर है, हालांकि, नियोक्ता द्वारा दिए जाने वाले सामूहिक बीमा पर 18% जीएसटी अभी भी लागू है।
टर्म इंश्योरेंस बाकी बीमा योजनाओं से इसलिए अलग है क्योंकि इसमें निवेश नहीं, सिर्फ सुरक्षा है और इसीलिए प्रीमियम सबसे कम होता है। दूसरी योजनाओं में आपकी जमा राशि का एक हिस्सा बचत या लाभ के रूप में जोड़ा जाता है, जबकि टर्म इंश्योरेंस में पूरी राशि जीवन सुरक्षा देने पर केंद्रित रहती है।
इसी कारण इसका प्रीमियम कम होता है। और कम खर्च में अधिक बीमा राशि मिल जाती है। यानी आप अपने परिवार के लिए एक मज़बूत आर्थिक सुरक्षा तैयार कर सकते हैं। यदि बीमा अवधि के दौरान बीमाधारक के साथ कोई अनहोनी हो जाती है, तो परिवार को एक बड़ी एकमुश्त राशि (लमसम) मिलती है, जिससे उनके ख़र्च और भविष्य की ज़रूरतें संभालना आसान हो जाता है।
बीमा कवच कितना होना चाहिए, यह निर्णय लेने में अक्सर ज़्यादातर लोग गलती कर देते हैं। कोई ₹50 लाख में रुक जाता है, कोई ₹1 करोड़ को काफी समझ लेता है, और कोई ₹5 करोड़ लेकर निश्चिंत हो जाता है। लेकिन आप यह कैसे सुनिश्चित करेंगे कि यह राशि आपके और आपके परिवार के लिए पर्याप्त होगी? सही नियम यह है कि बीमा कवच आपकी सालाना कमाई का 15 से 20 गुना होना चाहिए। यानी अगर आपकी सालाना कमाई ₹10 लाख है, तो कम से कम ₹1.5 से ₹2 करोड़ का कवच ज़रूरी माना जाता है।
इसके पीछे सबसे बड़ी वजह महंगाई है। अगर महंगाई दर औसतन 6% रहे, तो आज का ₹1 करोड़ करीब 12 साल में आधी कीमत के बराबर रह जाता है। यानी आज जो रकम बड़ी लगती है, वह भविष्य में उतनी सुरक्षा नहीं दे पाएगी। इसलिए बीमा राशि तय करते समय सिर्फ आज के खर्च नहीं, आने वाले वर्षों की ज़रूरी को भी ध्यान में रखना ज़रूरी है। अगर हिसाब लगाना मुश्किल लगे, तो टर्म इंश्योरेंस कैलकुलेटर सही कवच चुनने में मदद कर सकता है।
टर्म इंश्योरेंस सिर्फ एक काग़ज़ का टुकड़ा नहीं है, यह एक भरोसा है। और यह भरोसा तब काम आता है जब आप अपने परिवार के साथ नहीं होंगे। इसलिए कंपनी चुनते समय जल्दबाज़ी मत कीजिए। चार बातें ध्यान से देखिए।
यह बताता है कि कंपनी के पास भविष्य के दावों को चुकाने के लिए कितनी वित्तीय क्षमता है। आईआरडीएआई के अनुसार यह अनुपात कम से कम 1.5 होना चाहिए। टर्म इंश्योरेंस 20 से 30 साल का रिश्ता है, इसलिए आर्थिक रूप से मज़बूत कंपनी चुनना बेहद ज़रूरी है।
यह आंकड़ा दिखाता है कि कंपनी ने पिछले साल कितने प्रतिशत दावों का भुगतान किया। हमेशा ऐसी कंपनी चुननी चाहिए जिसका क्लेम सेटलमेंट रेशियो 98% या उससे अधिक हो, ताकि मुश्किल समय में परिवार को आर्थिक सहायता मिलने में परेशानी न हो।
मुश्किल वक्त में परिवार के पास इंतज़ार करने का समय नहीं होता। अच्छी कंपनी 1 से 2 दिन के अंदर दावा निपटा देती है। साथ ही ग्राहक सहायता चौबीसों घंटे उपलब्ध हो, ताकि किसी भी सवाल या परेशानी पर तुरंत मदद मिल सके। फोन, ईमेल, चैट, हर माध्यम पर कंपनी की पहुंच होनी चाहिए।
एक अच्छी योजना में सब कुछ होना चाहिए। गंभीर बीमारी कवच (क्रिटिकल इलनेस कवर), दुर्घटना मृत्यु लाभ (एक्सीडेंटल डेथ बेनिफिट), प्रीमियम भुगतान माफ़ी (प्रीमियम वेवर) जैसे अतिरिक्त लाभ छोटी सी रकम में जुड़ जाते हैं और सुरक्षा कई गुना बढ़ा देते हैं।
इन्हीं कारणों से बीमा कंपनी का चयन सोच-समझकर करना चाहिए। उदाहरण के लिए, कोटक लाइफ इंश्योरेंस का शोधन क्षमता अनुपात (सॉल्वेंसी रेशियो) हाल के वर्षों में 2.7 से 2.9 के बीच रहा है, जो नियामक द्वारा तय न्यूनतम सीमा से काफी अधिक है। वहीं, कंपनी का दावा निपटान अनुपात (क्लेम सेटलमेंट रेशियो) सालाना 98% से अधिक रहा है, जो यह दिखाता है कि कंपनी वित्तीय मज़बूती और दावों के भुगतान, दोनों मामलों में भरोसेमंद प्रदर्शन करती रही है।
जीएसटी हट चुकी है, अच्छी कंपनियां मौजूद हैं, और ऑनलाइन आवेदन में सिर्फ 10 से 15 मिनट लगते हैं और शुरुआत करना आसान है, बस एक टर्म इंश्योरेंस कैलकुलेटर पर अपनी आय और उम्र डालिए और कुछ ही पलों में आपको पता चल जाएगा कि कितने प्रीमियम में कितना कवच मिल सकता है। एक बात याद रखिए, टर्म इंश्योरेंस का प्रीमियम उम्र के साथ बढ़ता जाता है। आज जो योजना ₹600 महीने में मिल रही है, 5 साल बाद वही ₹1,000 की हो जाएगी।
बाज़ार में कई भरोसेमंद विकल्प मौजूद हैं। कोटक लाइफ इंश्योरेंस की ई-टर्म योजना उनमें से एक है, जिसमें ₹5 करोड़ तक का कवच और ज़रूरत के हिसाब से अतिरिक्त लाभ जोड़ने की सुविधा मिलती है। सही समय पर सही फ़ैसला लेना आपके परिवार के भविष्य को आर्थिक सुरक्षा दे सकता है।
तो आज ही फ़ैसला कीजिए। यह सिर्फ एक पॉलिसी नहीं, बल्कि आपके परिवार की भविष्य की सुरक्षा का भरोसा है और ऐसे भरोसे को टालना नहीं चाहिए।
जितनी जल्दी हो सके। 25 से 30 साल की उम्र टर्म इंश्योरेंस लेने के लिए सबसे सही है क्योंकि तब प्रीमियम भुगतान सबसे कम होता है।
22 सितंबर 2025 के बाद चुकाए गई प्रीमियम पर पूरा फायदा मिलेगा। उससे पहले भरा गया जीएसटी वापस नहीं मिलेगा।
जितना ज़्यादा अनुपात, उतनी मज़बूत कंपनी। यानी कंपनी एक साथ कई दावे आने पर भी उन्हें चुकाने में सक्षम है या नहीं, यही शोधन क्षमता अनुपात (सॉल्वेंसी रेशियो) बताता है। कोटक लाइफ इंश्योरेंस का सॉल्वेंसी रेशियो 2.7 से ऊपर है, जो आईआरडीएआई की न्यूनतम सीमा 1.5 से लगभग दोगुना है। यानी आपके परिवार का दावा समय पर और बिना किसी अड़चन के मिलने की पूरी संभावना है।
हां, पुरानी कर व्यवस्था में धारा 80सी के तहत ₹1.5 लाख तक की छूट और मृत्यु लाभ (डेथ बेनिफिट) पर धारा 10(10डी) के तहत भी छूट मिलती है।
हां, यह छूट किसी एक कंपनी तक सीमित नहीं है। किसी भी बीमाकर्ता से ली गई व्यक्तिगत टर्म इंश्योरेंस योजना पर यह लागू होगी।
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