Updated on: 30 January, 2026 05:04 PM IST | Mumbai
Bespoke Stories Studio
डेस्क जॉब करने वाले पेशेवरों के लिए तनाव, शारीरिक मुद्रा और पाचन को प्रबंधित करने हेतु डॉ. देबब्रता सेन द्वारा लिखित आयुर्वेदिक स्वास्थ्य मार्गदर्शिका।
पेशेवरों के लिए आयुर्वेद
डॉ. देबब्रत सेन, प्रसिद्ध आयुर्वेद चिकित्सक एवं परंपरा आयुर्वेद के संस्थापक, डेस्क पर लंबे समय तक काम करने वाले पेशेवरों के लिए एक व्यावहारिक और प्रभावी मार्गदर्शिका प्रस्तुत करते हैं। प्राचीन आयुर्वेदिक ज्ञान पर आधारित यह मार्गदर्शिका आधुनिक कार्यशैली से जुड़ी समस्याओं-जैसे गलत मुद्रा, आंखों में तनाव, पाचन संबंधी परेशानी और मानसिक थकान-से निपटने के लिए सरल लेकिन असरदार उपाय सुझाती है।
सही मुद्रा और मांसपेशियों का स्वास्थ्य
कुर्सी पर योग एवं सूक्ष्म गतिविधियाँ
कार्य के दौरान कुर्सी पर ही किए जाने वाले सरल योगासन और छोटे-छोटे मूवमेंट्स शरीर की जकड़न को कम करते हैं और रीढ़ की हड्डी को सही स्थिति में बनाए रखते हैं। नियमित अंतराल पर स्ट्रेचिंग करने से लंबे समय तक बैठने से होने वाली मांसपेशियों की समस्याओं से बचा जा सकता है।
एर्गोनॉमिक समायोजन
कार्यस्थल की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जो सही मुद्रा को सहयोग दे। यदि पैर ज़मीन तक ठीक से नहीं पहुँचते हों तो फुटरेस्ट का उपयोग करें और कुर्सी की ऊँचाई इस प्रकार समायोजित करें कि रीढ़ की हड्डी स्वाभाविक व सीधी स्थिति में रहे।
आंखों का स्वास्थ्य और स्क्रीन से होने वाली थकान
त्राटक (योगिक दृष्टि अभ्यास)
त्राटक का अभ्यास-किसी स्थिर बिंदु या दीपक की लौ पर ध्यान केंद्रित करना-आंखों की मांसपेशियों को सशक्त बनाता है और आंखों के तनाव को कम करता है। यह अभ्यास एकाग्रता और मानसिक स्पष्टता को भी बढ़ाता है।
20-20-20 नियम
हर 20 मिनट में 20 फीट दूर किसी वस्तु को 20 सेकंड तक देखें। यह सरल आदत स्क्रीन के लगातार उपयोग से होने वाली आंखों की थकान को कम करने में सहायक है।
पाचन स्वास्थ्य
पाचक हर्बल चाय
भोजन के बाद अदरक या जीरा जैसी गर्म हर्बल चाय का सेवन पाचन को बेहतर बनाता है और गैस व सूजन की समस्या को रोकता है। ये पेय पाचन एंजाइम्स को सक्रिय कर जठरांत्र तंत्र को शांत करते हैं।
भोजन के बाद योगासन
खाने के 15–30 मिनट बाद वज्रासन या सुप्त बद्ध कोणासन जैसे हल्के योगासन पाचन क्रिया को सुदृढ़ करते हैं और असहजता को कम करते हैं।
तनाव प्रबंधन और बर्नआउट से बचाव
एडैप्टोजेनिक औषधियाँ
अश्वगंधा और ब्राह्मी जैसी एडैप्टोजेनिक जड़ी-बूटियाँ तनाव को नियंत्रित करने और मानसिक सहनशक्ति बढ़ाने में सहायक होती हैं। ये शरीर में कॉर्टिसोल के स्तर को संतुलित कर मानसिक स्वास्थ्य को समर्थन देती हैं।
प्राणायाम
दीर्घ प्राणायाम (तीन-भाग श्वास) का अभ्यास पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम को सक्रिय करता है, जिससे मन शांत होता है और तनाव में कमी आती है।
आयुर्वेद के वैज्ञानिक पक्ष पर जागरूकता
एक समर्पित शिक्षक के रूप में डॉ. सेन आयुर्वेद की वैज्ञानिक गहराई पर लगातार प्रकाश डालते रहते हैं, विशेषकर इसके आठ प्रमुख अंगों-अष्टांग आयुर्वेद-पर। वे जीन-आधारित पौध चयन के पक्षधर हैं और आयुर्वेदिक औषधियों की प्रभावशीलता बढ़ाने हेतु आधुनिक जैव-प्रौद्योगिकी के विवेकपूर्ण उपयोग का समर्थन करते हैं, साथ ही इसकी मूल परंपराओं को अक्षुण्ण रखने पर बल देते हैं।
“लोग अक्सर सोचते हैं कि आयुर्वेद केवल जड़ी-बूटियाँ मिलाने का नाम है, जबकि यह एक सुव्यवस्थित और वैज्ञानिक चिकित्सा प्रणाली है,” वे कहते हैं। “इसके मूल सिद्धांतों को समझे बिना हम इसे विकृत रूप दे बैठते हैं।”
भविष्य की दिशा: 200 से अधिक उत्पाद और बढ़ता नेटवर्क
डॉ. सेन के नेतृत्व में परंपरा आयुर्वेद ने 200 से अधिक गहन शोध पर आधारित उत्पाद विकसित किए हैं, जो 12 कंपनी-स्वामित्व वाले केंद्रों और प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से उपलब्ध हैं। ये सभी उत्पाद अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं में कठोर गुणवत्ता मानकों के अंतर्गत विकसित किए जाते हैं, जिससे रोगियों को प्रामाणिक और प्रभावी उपचार सुनिश्चित हो सके।
उद्देश्य से प्रेरित दृष्टि
डॉ. देबब्रत सेन के लिए आयुर्वेद केवल एक पेशा नहीं, बल्कि एक साधना है। उनका दीर्घकालिक लक्ष्य परंपरा आयुर्वेद को विश्व स्तर पर प्रामाणिक आयुर्वेदिक चिकित्सा का मानक बनाना है-जहाँ पारंपरिक सूत्रों का संगम आधुनिक वैज्ञानिक प्रमाणों से हो।
नवाचार और शिक्षा के माध्यम से आयुर्वेद की शुद्धता को संरक्षित रखने का उनका संकल्प यह सुनिश्चित करता है कि यह प्राचीन चिकित्सा पद्धति भविष्य में भी वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था का एक अनिवार्य हिस्सा बनी रहे।
लेखक के बारे में
डॉ. देबब्रत सेन परंपरा आयुर्वेद के संस्थापक, आयुर्वेदाचार्य, शिक्षक और भारतीय शास्त्रीय चिकित्सा परंपराओं के वैश्विक प्रवक्ता हैं। दशकों के नैदानिक अनुभव के साथ वे आयुर्वेद को आधुनिक जीवनशैली के अनुरूप सरल, व्यक्तिगत और व्यावहारिक बनाने के लिए जाने जाते हैं।
इंस्टाग्राम पर उन्हें @drdebabratasenofficial पर फॉलो करें या परामर्श व जानकारी के लिए parampara.online पर विज़िट करें।
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