Updated on: 29 September, 2026 03:57 PM IST | Mumbai
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बटरफ्लाई आयुर्वेद पारंपरिक आयुर्वेदिक फ़ॉर्मूलों को हर्बल चाय, फ़ंक्शनल फ़ूड और कैफ़े के अनुभव के साथ मिलाता है।
बटरफ्लाई आयुर्वेद.
आधुनिक शहरी भारत में आयुर्वेद लंबे समय तक मुख्यतः दो जगहों तक सीमित रहा है-वैद्य के क्लिनिक में और बाथरूम की अलमारी के उस पिछले हिस्से में, जहां पाचन संबंधी पाउडर पड़े रहते हैं जिन्हें खरीदने की बात शायद किसी को ठीक से याद भी नहीं रहती। मेन्यू पर इसकी मौजूदगी लगभग न के बराबर रही है।
2014 में Akshi Khandelwal द्वारा स्थापित वेलनेस कंपनी Butterfly Ayurveda पिछले एक दशक से अधिक समय से इसी धारणा को बदलने की कोशिश कर रही है। कंपनी का उद्देश्य आयुर्वेद की औषधीय जड़ों से दूरी बनाना नहीं, बल्कि उन्हें हर्बल चाय, बेकरी उत्पादों और अब कैफ़े फॉर्मेट तक विस्तार देना है-ताकि वही ज्ञान, जो कभी डॉक्टर की पर्ची के रूप में लोगों तक पहुंचता था, अब नाश्ते की मेज़ पर भी दिखाई दे।
एक ऐसी कंपनी जिसे जानबूझकर उल्टे क्रम में बनाया गया
Khandelwal का इस श्रेणी तक पहुंचने का रास्ता सामान्य नहीं था। उन्होंने Yale University से International and Development Economics में मास्टर्स किया है और अपने करियर की शुरुआत माइक्रोफाइनेंस संस्था BASIX और Centre for Microfinance के साथ की थी। यानी उनकी शुरुआती पेशेवर दुनिया आर्थिक शोध से जुड़ी थी, वेलनेस से नहीं।
आयुर्वेद में उनकी रुचि निजी अनुभव से शुरू हुई। प्राकृतिक चिकित्सा और आयुर्वेदिक उपचारों से अपनी रिकवरी के दौरान उनका इस प्रणाली से जुड़ाव बढ़ा, जो बाद में कारोबार में बदल गया।
दिलचस्प बात यह है कि 2013 में, Butterfly Ayurveda के औपचारिक रूप से अस्तित्व में आने से एक साल पहले ही, उन्होंने एक रिसर्च और डेवलपमेंट यूनिट बनानी शुरू कर दी थी। ब्रांड बनाने से पहले फॉर्मुलेशन और रिसर्च का ढांचा खड़ा करने की यही सोच आगे चलकर कंपनी के विकास की नींव बनी।
अब तक कंपनी 50 से अधिक इन-हाउस फॉर्मुलेशन विकसित कर चुकी है, जिनमें हर्बल चाय, आयुर्वेदिक दवाएं और फंक्शनल बेकरी उत्पाद शामिल हैं।
ऐसी दवाएं, जो रोज़मर्रा की समस्याओं की भाषा बोलती हैं
कंपनी की दवा श्रृंखला न तो पूरी तरह पारंपरिक आयुर्वेदिक फार्मेसी जैसी दिखती है और न ही आधुनिक न्यूट्रास्यूटिकल शेल्फ जैसी। यह दोनों के बीच का एक मिश्रित मॉडल पेश करती है।
उदाहरण के तौर पर, Pancreofly को ब्लड ग्लूकोज़ और पैंक्रियास सपोर्ट के लिए पेश किया गया है, जबकि Livofly को लिवर हेल्थ के लिए फॉर्मुलेट किया गया है। ये उत्पाद व्यापक ‘वेलनेस’ दावों के बजाय विशिष्ट और आम स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं पर केंद्रित हैं।
इसी तरह Colonofly को कोलन क्लेंज़ के लिए, Bronchiofly को खांसी के लिए और Ortho-Heal को जोड़ों व मांसपेशियों के दर्द के लिए बनाया गया है। यह वह श्रेणी है जो सीधे उन समस्याओं से जुड़ती है जिनका समाधान भारतीय परिवार परंपरागत रूप से घरेलू नुस्खों या ओवर-द-काउंटर एलोपैथिक दवाओं से करते आए हैं।
कंपनी के अनुसार, ये सभी उत्पाद GMP-प्रमाणित सुविधाओं में बनाए जाते हैं और राज्य के AYUSH विभाग के तहत लाइसेंस प्राप्त हैं। यही नियामक ढांचा आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी उत्पादों को नियंत्रित करता है और कंपनी की चाय श्रृंखला पर भी लागू होता है।
चाय, जो दवा और दैनिक आदत के बीच पुल का काम करती है
अगर आयुर्वेद का पारंपरिक स्थान दवा की अलमारी रहा है, तो Butterfly Ayurveda की चाय श्रृंखला उसे रोज़मर्रा की आदत का हिस्सा बनाने की कोशिश करती है।
इसकी रेंज त्रिदोष सिद्धांत-वात, पित्त और कफ-के आधार पर बनाई गई है। अलग-अलग ब्लेंड्स दिन के अलग-अलग समय के अनुरूप तैयार किए गए हैं।
सुबह के लिए Suprabhat Chai में तुलसी, मुलेठी और ब्राह्मी जैसे तत्व हैं। इसे उस सुस्ती से जोड़कर देखा गया है, जिसे आयुर्वेद सुबह के कफ-प्रधान समय से संबद्ध करता है।
दोपहर के लिए Shubh Saanjh Chai में पुदीना, अजवाइन और सौंफ शामिल हैं, जिसका उद्देश्य दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक के वात-प्रधान समय में पाचन को सहारा देना है।
वहीं Ratri Chai शाम के लिए तैयार किया गया एक त्रिदोष-संतुलित ब्लेंड है, जिसमें अश्वगंधा, ब्राह्मी और शंखपुष्पी जैसे तत्व शामिल हैं।
यह अधिकांश हर्बल टी ब्रांड्स से संर
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