Updated on: 13 August, 2026 05:15 PM IST | Mumbai
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Smartwatch हार्ट रेट कैसे मापती है? जानें PPG और ECG सेंसर कैसे काम करते हैं और उनकी रीडिंग कितनी सटीक होती है।
Smartwatch Heart Rate.
आजकल स्मार्टवॉच सिर्फ समय देखने की डिवाइस नहीं रही। यह कदम, कैलोरी, स्ट्रेस और नींद के साथ दिल की धड़कन भी ट्रैक करती है, लेकिन इसके पीछे कौन-सी तकनीक काम करती है और इसकी रीडिंग कितनी सही होती है?
Smartwatch Heart Rate कैसे मापती है ?
स्मार्टवॉच में हार्ट रेट मापने के लिए अलग-अलग तकनीक इस्तेमाल होती हैं। सबसे आम तकनीक PPG यानी Photoplethysmography है। कई प्रीमियम मॉडल में ECG यानी Electrocardiogram सेंसर भी मिलता है। PPG सेंसर रोशनी की मदद से त्वचा के नीचे खून के बहाव में होने वाले बदलाव को पहचानता है। हर धड़कन के साथ छोटी रक्त वाहिकाएं यानी कैपिलरीज फैलती और सिकुड़ती हैं।
वॉच इस बदलाव को लगातार रिकॉर्ड करती है। इसके बाद सॉफ्टवेयर इन संकेतों का विश्लेषण करता है और स्क्रीन पर हार्ट रेट यानी प्रति मिनट धड़कनों की संख्या दिखाता है। यही तकनीक रेस्टिंग हार्ट रेट पर नजर रखने में भी मदद करती है। इससे एक्टिविटी और स्ट्रेस में होने वाले बदलाव का अंदाजा लगाया जा सकता है।
PPG सेंसर में हरी रोशनी क्यों होती है ?
आपने स्मार्टवॉच के पीछे अक्सर हरी लाइट चमकते देखी होगी। यह सिर्फ डिजाइन का हिस्सा नहीं है। इसका सीधा संबंध PPG सेंसर से है। हमारे खून में हीमोग्लोबिन होता है। जब कैपिलरीज खून से भरती हैं, तो वे हरी रोशनी को ज्यादा सोखती हैं। सेंसर यह देखता है कि कितनी रोशनी वापस लौट रही है। जब कैपिलरी में खून की मात्रा बढ़ती है, तो वापस आने वाली रोशनी में बदलाव होता है। स्मार्टवॉच इसी पैटर्न को पकड़कर धड़कनों की गिनती करती है। हरी रोशनी त्वचा में बहुत ज्यादा गहराई तक नहीं जाती इसलिए सेंसर शरीर की सतह के पास होने वाले खून के बदलाव को आसानी से रिकॉर्ड कर पाता है।
ECG सेंसर कैसे करता है काम ?
कुछ महंगी स्मार्टवॉच में ECG सेंसर भी दिया जाता है। इसका तरीका PPG से अलग है। ECG दिल की धड़कन से जुड़े इलेक्ट्रिकल सिग्नल को मापता है। इसके लिए सेंसर का त्वचा के संपर्क में होना जरूरी होता है। जब यूजर सेंसर को छूता है, तो वॉच दिल की इलेक्ट्रिकल गतिविधि में होने वाले बदलाव को रिकॉर्ड करती है। इससे हार्ट रेट की रफ्तार और धड़कनों के बीच का समय समझने में मदद मिलती है। ECG सेंसर Atrial Fibrillation यानी AFib जैसी अनियमित धड़कन को भी पहचान सकता है। यही वजह है कि ECG वाली स्मार्टवॉच को सामान्य PPG मॉनिटर से ज्यादा एडवांस माना जाता है। हालांकि, दोनों तकनीकों का इस्तेमाल अलग-अलग जरूरतों के लिए होता है।
ECG या PPG, कौन ज्यादा सटीक ?
अगर सिर्फ हार्ट रेट की निगरानी की बात करें, तो ECG तकनीक ज्यादा सटीक मानी जाती है। लेकिन रोजमर्रा की निगरानी में PPG भी काफी उपयोगी है। PPG की रीडिंग पर कुछ बाहरी चीजों का असर पड़ सकता है। हाथ का ज्यादा हिलना, त्वचा पर टैटू और डार्क स्किन जैसे कारण रीडिंग को प्रभावित कर सकते हैं। वॉच का हाथ पर सही तरीके से फिट होना भी जरूरी है। अगर स्मार्टवॉच बहुत ढीली है, तो सेंसर को सही सिग्नल मिलने में परेशानी हो सकती है इसलिए स्मार्टवॉच की हार्ट रेट रीडिंग को एक उपयोगी संकेत समझना चाहिए। इसे हर स्थिति में मेडिकल टेस्ट का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
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