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टनल : विकास की रफ्तार और पहाड़ों की हकीकत

Updated on: 14 April, 2026 05:12 PM IST | Mumbai
Bespoke Stories Studio | bespokestories@mid-day.com

Sunil Chaturvedi द्वारा लिखी गई किताब ‘Tunnel’ में हिमालयी बुनियादी ढांचे और विकास की चुनौतियों के पीछे छिपी मानवीय कहानियों को उजागर किया गया है।

टनल नावेल रिव्यू

टनल नावेल रिव्यू

हम अक्सर सुनते हैं कि देश तेजी से आगे बढ़ रहा है। नई सड़कें बन रही हैं, सुरंगें तैयार हो रही हैं, और दूर-दराज के इलाकों तक पहुंच आसान होती जा रही है।


यह बदलाव दिखता भी है और जरूरी भी लगता है।

लेकिन क्या हम कभी रुककर यह सोचते हैं कि इस विकास की रफ्तार के पीछे क्या-क्या छूट जाता है? Tunnel, लेखक  Sunil Chaturvedi  का नया उपन्यास, इसी सवाल को बहुत सादगी और सच्चाई के साथ सामने लाता है। यह किताब हिमालय के उन इलाकों की कहानी है, जहां पहाड़ों के भीतर सुरंगें बनाई जा रही हैं, और उन लोगों की भी, जो इस काम का हिस्सा हैं, लेकिन अक्सर नजर नहीं आते।


जहां हर दिन काम शुरू होता है, वहीं कहानी भी शुरू होती है

हिमालय के पहाड़ों में हर सुबह मजदूर सुरंगों के भीतर उतरते हैं। यह उनके लिए कोई नई बात नहीं, बल्कि रोज की दिनचर्या है।

वे अलग-अलग राज्यों से आते हैं, कई बार अपने घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर। उनके लिए यह काम सिर्फ रोजी-रोटी का जरिया है। वे काम करते हैं, कमाते हैं, और जितना हो सके घर भेजते हैं।

जब कोई हादसा होता है, तो कुछ समय के लिए खबरें तेज हो जाती हैं। लोग बात करते हैं, चिंता जताते हैं।लेकिन जैसे-जैसे समय गुजरता है, सब सामान्य हो जाता है। काम फिर शुरू हो जाता है।

यहीं से यह कहानी अपना असली रूप लेती है।यह उपन्यास उस समय की बात करता है, जब खबरें खत्म हो जाती हैं, लेकिन जिंदगी वहीं चलती रहती है।

सिर्फ प्रोजेक्ट नहीं, लोगों की जिंदगी भी जुड़ी है

हम अक्सर सुरंग, सड़क या किसी बड़े प्रोजेक्ट को एक उपलब्धि के रूप में देखते हैं।हम आंकड़ों में सोचते हैं, कितने किलोमीटर बना, कितने समय में बना।लेकिन इस कहानी का नजरिया थोड़ा अलग है। यह किताब दिखाती है कि हर प्रोजेक्ट के पीछे सिर्फ मशीनें और इंजीनियरिंग नहीं होती, बल्कि लोगों की जिंदगी भी जुड़ी होती है।यहां पहाड़ सिर्फ एक लोकेशन नहीं है। उसकी अपनी प्रकृति है, अपनी सीमाएं हैं। जब  इन सीमाओं को समझे बिना काम होता है, तो उसका असर धीरे-धीरे सामने आता है। और यही बात इस कहानी को गहराई देती है।

जो दिखते नहीं, वही इस कहानी के असली चेहरे हैं

हर बड़े काम के पीछे कुछ ऐसे लोग होते हैं, जो सामने नहीं आते।हम उन्हें नाम से नहीं जानते, बस “मजदूर” कहकर आगे बढ़ जाते हैं। यह कहानी उन्हीं लोगों को पहचान देती है।

यहां मजदूर सिर्फ संख्या नहीं हैं। वे अपने परिवार, जिम्मेदारियों और छोटे-छोटे सपनों के साथ जीते हुए लोग हैं। कोई अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए पैसे जोड़ रहा है। कोई त्योहार पर घर जाने का इंतजार कर रहा है। किसी के लिए यह काम एक मजबूरी है, तो किसी के लिए एक उम्मीद। इनकी यही सादगी और सच्चाई इस कहानी को असली बनाती है।

विकास जरूरी है, लेकिन सवाल भी जरूरी हैं

आज भारत में पहाड़ी इलाकों में तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर का काम हो रहा है। सड़कें बन रही हैं, सुरंगें बन रही हैं, कनेक्टिविटी बढ़ रही है।यह सब जरूरी भी है। लेकिन इसके साथ कुछ सवाल भी खड़े होते हैं।

  • क्या हम पर्यावरण को उतनी ही अहमियत दे रहे हैं?
  • क्या मजदूरों की सुरक्षा उतनी ही प्राथमिकता है?
  • क्या हम सिर्फ तेजी देख रहे हैं, या उसके असर को भी समझ रहे हैं?

टनल इन सवालों का सीधा जवाब देने की कोशिश नहीं करता। लेकिन यह हमें इनके बारे में सोचने के लिए जरूर मजबूर करता है।

अनुभव से निकली हुई कहानी

किसी भी कहानी की असली ताकत उसके पीछे के अनुभव में होती है। और यही बात इस किताब को अलग बनाती है। Sunil Chaturvedi ने सालों तक जल संरक्षण और ग्रामीण क्षेत्रों में काम किया है। उन्होंने हजारों लोगों के साथ जुड़कर जमीन, पानी और पर्यावरण की वास्तविक चुनौतियों को करीब से समझा है। यह अनुभव इस उपन्यास में साफ नजर आता है। कहानी कहीं भी बनावटी नहीं लगती। यह पढ़ते हुए महसूस होता है कि यह कहानी देखी, समझी और जी हुई है।

लेखन की पहचान, जो हर किताब में दिखती है

अगर हम उनके पिछले काम को देखें, तो एक बात साफ नजर आती है। वे हमेशा आम लोगों की कहानियों को केंद्र में रखते हैं।

  • Mahamaya में उन्होंने आस्था और संस्थाओं के बीच के रिश्ते को दिखाया।
  • Kalichaat में किसानों की जिंदगी और बदलते हालात की बात की।
  • Lapka में पर्यटन के असर को सामने रखा।

अब टनल में वही नजरिया पहाड़, विकास और लोगों के बीच के रिश्ते पर दिखता है। हर बार विषय बदलता है, लेकिन फोकस वही रहता है - इंसान।

क्यों पढ़नी चाहिए यह किताब

आज हम विकास की बात तो करते हैं, लेकिन उसका दूसरा पहलू अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। हम आंकड़े देखते हैं, लेकिन कहानियां नहीं। यह किताब उसी छूटे हुए हिस्से को सामने लाती है।

टनल एक आसान भाषा में लिखी गई, सीधी और असरदार कहानी है। इसे पढ़ने के लिए किसी खास पृष्ठभूमि की जरूरत नहीं है। यह  ऐसी कहानी है  जो धीरे धीरे मन में सवाल उठाती है और पढ़ने के बाद भी हमारी सोच में बनी रहती है । शायद यही इसे खास बनाता है।

इस कहानी को और करीब से जानने के लिए आप “टनल” को यहाँ से ऑर्डर कर सकते है :

https://www.amazon.in/Tunnel-%%Ż%%%%%%-Gasping-Breaths-Himalayas/dp/8190892754/ref=sr_1_1?crid=1YR3ZJDDKUHCW&dib=eyJ2IjoiMSJ9.4PCGDCSS5RJ0h9JK1ANzg05PzhralXYX6BwNlH4tHiE.JNpFHBczBUavVoN0TY48piuXdMCAQK-huiBqpwYdFXc&dib_tag=se&keywords=tunnel+by+sunil+chaturvedi&qid=1776160540&s=books&sprefix=tunnel+by+sunil+chaturvediŴŴ&sr=1-1

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