Updated on: 14 August, 2026 12:12 PM IST | Mumbai
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आवारापन 2 रिव्यू: इमरान हाशमी की दमदार वापसी, भावनात्मक कहानी, शानदार संगीत और नितिन कक्कड़ के निर्देशन वाली फिल्म को 4 स्टार।
आवारापन 2 समीक्षा.
फिल्म: आवारापन 2
कलाकार: इमरान हाशमी, दिशा पाटनी, शबाना आज़मी, पूरन गब्बी, सुविंदर विक्की और विजयंत कोहली
निर्देशक: नितिन कक्कड़
रिलीज़ डेट: 14 अगस्त 2026
रनटाइम: 140 मिनट
रेटिंग: 4 स्टार्स
कहां देखें: सिनेमाघर
किसी फिल्म के किरदार को लगभग दो दशक बाद वापस लाना आसान नहीं होता। दर्शकों की उम्मीदें भी होती हैं और पुरानी यादों का दबाव भी। आवारापन 2 इसी चुनौती के बीच शिवम पंडित को फिर पर्दे पर लेकर आती है। अच्छी बात यह है कि फिल्म केवल पुरानी आवारापन की लोकप्रियता के सहारे आगे नहीं बढ़ती, बल्कि शिवम को एक नई वजह देती है लड़ने की।
लेकिन फिल्म देखने से पहले पहली आवारापन देख लेना समझदारी होगी। सीक्वल की शुरुआत पहले पार्ट के बाद से होती है और फ्लैशबैक के जरिए पिछली कहानी की झलक भी दी जाती है। यानी यह पूरी तरह एक स्वतंत्र कहानी नहीं है। पहली फिल्म से जुड़ाव होगा तो शिवम के हर फैसले और हर भावना का असर कहीं ज्यादा महसूस होगा।
कहानी में शिवम अब भी आलिया की यादों के साथ जी रहा है। आलिया की कब्र पर एक दिन उसे एक नवजात बच्ची के रोने की आवाज सुनाई देती है। वह बच्ची को अनाथालय में छोड़ता है और उसका नाम आलिया रख देता है। इसके बाद शिवम न सिर्फ उस अनाथालय की मदद करता है, बल्कि बच्ची से भी उसका गहरा रिश्ता बन जाता है।
फिर कहानी अचानक एक अंधेरे मोड़ पर पहुंचती है। बच्ची को एक दंपती गोद लेता है, लेकिन बाद में शिवम को मालूम पड़ता है कि आलिया ह्यूमन ट्रैफिकिंग का शिकार हो गई है। यहीं से शिवम की तलाश और संघर्ष शुरू होता है। फिल्म का इमोशनल आधार यही है कि इस बार शिवम किसी अपने अतीत को नहीं, बल्कि एक मासूम के भविष्य को बचाने के लिए लड़ रहा है।
लेखन के स्तर पर फिल्म काफी मजबूत है। स्क्रीनप्ले कहानी और भावनाओं के बीच अच्छा संतुलन बनाता है। संवाद पहली फिल्म से ज्यादा गंभीर और परिपक्व हैं। कई जगह फिल्म आपको सिर्फ देखने नहीं, सोचने पर भी मजबूर करती है। हालांकि कुछ हिस्सों में कहानी की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ती है और यहां एडिटिंग ज्यादा प्रभावी हो सकती थी।
नितिन कक्कड़ का निर्देशन फिल्म के भावनात्मक पक्ष को अच्छी तरह संभालता है। VFX का इस्तेमाल सीमित है, लेकिन जरूरत के मुताबिक ठीक बैठता है। वहीं संगीत फिल्म की खासियत है। गाने कहानी के साथ इतने सहज तरीके से जुड़े हैं कि वे सिर्फ म्यूजिकल ब्रेक नहीं लगते, बल्कि कहानी की भावनाओं को आगे बढ़ाते हैं।
और फिर आते हैं इमरान हाशमी। शिवम पंडित के रूप में वह फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं। उनकी लंबी जुल्फें, तीखी आंखें और दमदार फिजीक किरदार के लुक को जरूर मजबूत करते हैं, लेकिन असली प्रभाव उनकी एक्टिंग का है। गुस्से में उनका तेवर और खामोशी में उनका दर्द दोनों असरदार हैं। वह कई दृश्यों में बिना ज्यादा कुछ कहे पूरा भाव पहुंचा देते हैं।
शबाना आजमी का स्क्रीन टाइम कम है, लेकिन उनकी मौजूदगी असर छोड़ती है। पूरन गब्बी की बॉडी लैंग्वेज और स्क्रीन प्रेजेंस मजबूत है। दिशा पाटनी भी अपने किरदार में गंभीरता लाती हैं और यह साबित करती हैं कि वह सिर्फ ग्लैमर के लिए नहीं हैं। सुविंदर विक्की, विजयंत कोहली समेत बाकी कलाकार भी अच्छा काम करते हैं। हम इस फिल्म को 5 में से 4 स्टार देते हैं।
निष्कर्ष: आवारापन 2 में पहली फिल्म जैसा सरप्राइज शायद नहीं है, लेकिन इसकी भावनात्मक पकड़ मजबूत है। नॉस्टेल्जिया, संगीत और इमरान हाशमी का प्रदर्शन फिल्म को संभालते हैं, जबकि प्यार और इंसानियत का संदेश इसे सिर्फ बदले की कहानी बनने से रोकता है।
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