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Lust Stories 3 Review: बड़ी, बोल्ड और पहले से ज्यादा मजेदार, तीसरा चैप्टर लाता है नया तड़का

Updated on: 18 September, 2026 04:07 PM IST | Mumbai
Bespoke Stories Studio | bespokestories@mid-day.com

रेटिंग - 4 स्टार

Lust Stories 3

Lust Stories 3

लस्ट स्टोरीज और लस्ट स्टोरीज 2 की सफलता के बाद फ्रेंचाइज़ी अपने तीसरे अध्याय के साथ लौट आई है और अच्छी बात यह है कि यह पहले जो चल चुका है, उसे बस दोहराने की कोशिश नहीं करती। लस्ट स्टोरीज 3 Lust Stories 3 एक बार फिर एंथोलॉजी फॉर्मेट को अपनाती है, लेकिन हर निर्देशक को अपनी अलग पहचान और स्वाद दिखाने की पूरी आजादी देती है।
इस नए अध्याय की सबसे बड़ी ताकत है इसकी विविधता। एक कहानी असहज और अनोखी है, दूसरी हल्की-फुल्की और चुलबुली, तीसरी शादी के उलझे हुए पहलुओं में जाती है और चौथी हमें सीधे 80 के दशक में पहुंचा देती है। इसके बावजूद चारों कहानियों के बीच चाहत, नजदीकियों और इंसानी रिश्तों की एक कड़ी बनी रहती है।


विक्रमादित्य मोटवाने का सेगमेंट, जिसमें राधिका आप्टे, कोंकणा सेन शर्मा, विजय वर्मा और अभिषेक शर्मा हैं, शुरुआत से ही सबसे अलग नजर आता है। पति-पत्नी के पार्टनर बदलने जैसे विषय को आसानी से सनसनीखेज बनाया जा सकता था, लेकिन कोरियन फिक्शन का प्रभाव कहानी को एक अलग नैरेटिव टच देता है। कलाकार भी असहजता और तनाव को बिना ओवरडू किए संभालते हैं।

किरण राव गुरफतेह पीरजादा और सना थंपी के साथ बिल्कुल दूसरी दिशा में जाती हैं। यह कहानी हल्के कदमों से चलती है और ड्रग्स व पैसों से जुड़ी एक मजेदार ठगी की कहानी जैसी लगती है। कहानी में इतने ट्विस्ट हैं कि दिलचस्पी बनी रहती है और एक अप्रत्याशित मोड़ इसमें अच्छा-खासा मसाला भी डाल देता है।


अली फजल और राधिका मदान के साथ शकुन बत्रा का सेगमेंट भावनात्मक रूप से ज्यादा परतदार है। शादी, चाहत, थेरेपी, परिवार का दबाव और तलाक, सब मिलकर इस बड़े सवाल की तरफ ले जाते हैं कि जब कोई रिश्ता उतना आसान नहीं रह जाता जितना कभी हुआ करता था, तब क्या होता है। हम इस फिल्म को 4 स्टार देते हैं।

विशाल भारद्वाज अदिति राव हैदरी, सिद्धार्थ और गजराज राव के साथ सबसे अलग पीरियड फ्लेवर लेकर आते हैं। 1987 में सेट यह कहानी उस दौर की पृष्ठभूमि में सेक्स एजुकेशन जैसे विषय को छूती है और इसी दौरान कई मजेदार और क्वर्की डिटेल्स सामने आती हैं। नक्स वोमिका और बेलाडोना जैसी होम्योपैथिक दवाओं का इस्तेमाल भी कहानी को अलग पहचान देता है।

हर कहानी का मूड एक जैसा नहीं है और यही इस एंथोलॉजी का पॉइंट है। कुछ कहानियां तुरंत पकड़ लेती हैं, जबकि कुछ धीरे-धीरे अपना असर छोड़ती हैं। लेकिन हर सेगमेंट में इतनी पर्सनैलिटी है कि कहानी आगे बढ़ती रहती है।

फैसला:
लस्ट स्टोरीज 3 समझती है कि इस फ्रेंचाइज़ी की असली ताकत क्या है। यहां लस्ट सिर्फ एंट्री पॉइंट है, असली कहानियां रिश्तों, असुरक्षाओं, फैसलों और उन बातों के बारे में हैं जिन्हें लोग अक्सर कह नहीं पाते। चार कहानियां, चार अलग मूड और एक ऐसा फॉर्मेट जिसमें अभी भी काफी जान बाकी है।

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