Updated on: 25 September, 2026 02:31 PM IST | Mumbai
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‘महाकाव्य श्री रामायण कथा’ आस्था, रिश्तों और भावनाओं को सरल अंदाज में पेश करती है, दमदार अभिनय और संगीत के साथ।
महाकाव्य श्री रामायण कथा.
देव शर्मा, अंजलि अरोड़ा और राजनेश दुग्गल की दमदार मौजूदगी के साथ ‘महाकाव्य श्री रामायण कथा’ आस्था, भावनाओं और रिश्तों की जानी-पहचानी कहानी को सरल और संवेदनशील अंदाज में पर्दे पर पेश करती है।
रेटिंग: 5 में से 4 स्टार
रामायण सिर्फ एक कथा नहीं, बल्कि भारतीय जनमानस से जुड़ी ऐसी विरासत है, जिसे हर पीढ़ी ने अपने-अपने तरीके से महसूस किया है। ऐसे में इस महान गाथा को बड़े पर्दे पर दोबारा प्रस्तुत करना अपने आप में एक चुनौती है। महाकाव्य श्री रामायण कथा इस चुनौती का सामना किसी बड़े प्रयोग या कहानी को बदलने की कोशिश के बजाय उसकी मूल भावनाओं और आस्था को केंद्र में रखकर करती है।
निर्देशक अभिषेक सिंह ने फिल्म को भव्यता से ज्यादा भावनात्मक जुड़ाव देने की कोशिश की है। कहानी में एक सादगी दिखाई देती है और यही इसकी खासियत भी बनती है। फिल्म श्री राम के जीवन और उनके संघर्षों को एक श्रद्धापूर्ण नजरिए से आगे बढ़ाती है, जहां रिश्ते, त्याग, मर्यादा और विश्वास कहानी के अहम हिस्से बने रहते हैं।

फिल्म की सबसे उल्लेखनीय खूबियों में इसका संगीत और बैकग्राउंड स्कोर शामिल है। कई दृश्यों में BGM कहानी के भाव को और गहरा करता है। वनवास, विरह, भक्ति, संघर्ष या युद्ध की तैयारी जैसे प्रसंगों में संगीत माहौल बनाने का काम करता है और दर्शक को उस भावनात्मक स्थिति से जोड़ता है।
गानों की बात करें तो ‘सिया राम’ को जावेद अली ने अपनी आवाज से एक मधुर और भक्तिमय रंग दिया है। ‘राम जी की सेना’ कहानी में ऊर्जा लेकर आता है, जबकि कैलाश खेर का ‘हे हनुमान’ आध्यात्मिक प्रभाव पैदा करता है। एल्बम में शान, शाहिद मल्ल्या और वैशाली सामंत जैसे गायकों की आवाजें भी सुनने को मिलती हैं, जिससे फिल्म का संगीत पक्ष विविध होने के साथ-साथ इसकी धार्मिक और भावनात्मक पहचान से जुड़ा रहता है।
अभिनय की बात करें तो देव शर्मा ने श्री राम के किरदार में संयम और गरिमा को बनाए रखा है। उनके अभिनय में पात्र की शांति, धैर्य और करुणा नजर आती है। अंजलि अरोड़ा ने माता सीता के किरदार में सौम्यता के साथ-साथ भावनात्मक मजबूती दिखाने की कोशिश की है। वहीं शील वर्मा लक्ष्मण के रूप में श्री राम के प्रति अपने समर्पण और भाईचारे को प्रभावी ढंग से सामने रखते हैं।
निर्भय वाधवा का हनुमान वाला किरदार कहानी में जोश और ऊर्जा लेकर आता है। दूसरी ओर, राजनेश दुग्गल का रावण फिल्म के नाटकीय पक्ष को मजबूत करता है। श्री राम की मर्यादा और रावण के अहंकार के बीच का अंतर कहानी के कई हिस्सों में प्रभाव पैदा करता है।
फिल्म की एक और खास बात इसकी रफ्तार है। रामायण जैसी विस्तृत कथा में कई किरदार और महत्वपूर्ण घटनाएं हैं, बावजूद इसके फिल्म कहानी को जरूरत से ज्यादा खींचने से बचती है। अयोध्या से वनवास, सीता हरण, हनुमान का आगमन, लंका की ओर बढ़ती कहानी और रावण के साथ अंतिम संघर्ष तक फिल्म परिचित घटनाओं को एक सहज गति के साथ आगे ले जाती है।
दृश्यात्मक स्तर पर भी फिल्म एक पारंपरिक प्रस्तुति को प्राथमिकता देती है। यहां हर दृश्य को सिर्फ भव्य बनाने की कोशिश नहीं की गई है, बल्कि कथा के आध्यात्मिक और भावनात्मक पक्ष को केंद्र में रखा गया है। यही वजह है कि फिल्म का अनुभव उन दर्शकों के लिए परिचित महसूस हो सकता है, जिन्होंने रामायण की कथा अपने परिवार, रामलीला, मंदिरों या टेलीविजन के माध्यम से बचपन से सुनी और देखी है।
शायद यही इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत भी है। महाकाव्य श्री रामायण कथा रामायण को किसी नए या चौंकाने वाले रूप में पेश करने की कोशिश नहीं करती। इसके बजाय यह उसी परिचित कथा को बड़े पर्दे पर एक श्रद्धापूर्ण सिनेमाई अनुभव के रूप में सामने रखती है।
प्रकाश महोबिया और संजय बुंदेला द्वारा महोबिया फिल्म्स प्रोडक्शन के बैनर तले निर्मित इस फिल्म को एजे फिल्म एंटरटेनमेंट वर्ल्ड और अजय कनोजिया प्रस्तुत कर रहे हैं। फिल्म के सह-निर्माता हनी कुलदीप अग्रवाल और मोनिका सेन हैं।
कुल मिलाकर, महाकाव्य श्री रामायण कथा रामायण की कहानी को नए सिरे से परिभाषित करने के बजाय उसके मूल भाव और आस्था को बनाए रखने पर ध्यान देती है। कलाकारों का अभिनय, भावपूर्ण संगीत, असरदार बैकग्राउंड स्कोर और कहानी की सहज गति फिल्म को एक सरल लेकिन भावनात्मक अनुभव देते हैं।
फिल्म का केंद्र किसी एक किरदार की जीत या किसी बड़े सिनेमाई चमत्कार से ज्यादा आस्था, रिश्तों, त्याग और मूल्यों पर है। और शायद इसी सादगी में महाकाव्य श्री रामायण कथा अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश करती है।
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