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पूर्वी भारत का सबसे तेज़ सड़क क्रांति: बिहार के एक्सप्रेसवे बदल रहे हैं विकास की दिशा

Updated on: 10 October, 2025 03:55 PM IST | Mumbai
Bespoke Stories Studio | bespokestories@mid-day.com

बिहार के पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन ने एक्सप्रेसवे, HAM मॉडल और एआई ब्रिज मॉनिटरिंग पर बताया कैसे बिहार का सड़क ढांचा बदल रहा है।

बिहार चुनाव 2025

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बिहार चुनाव विशेष साक्षात्कार


श्री नितिन नवीन, पथ निर्माण मंत्री, बिहार सरकार के साथ बातचीत

पिछले कुछ वर्षों में बिहार ने अपने परिवहन बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व बदलाव की शुरुआत की है। पुराने पुलों और धीमी ग्रामीण सड़कों से आगे बढ़ते हुए राज्य अब आधुनिक एक्सप्रेसवे, एआई आधारित निगरानी और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। इस परिवर्तन की वास्तविक स्थिति को समझने के लिए हमने बातचीत की बिहार सरकार के पथ निर्माण मंत्री श्री नितिन नवीन से। प्रस्तुत है उनसे हुई विस्तृत बातचीत - जिसमें प्रमुख एक्सप्रेसवे परियोजनाएं, हाइब्रिड एन्‍यूटी मॉडल (HAM), एआई आधारित ब्रिज मॉनिटरिंग, चुनौतियां और इन सबके प्रभाव पर चर्चा की गई।


प्रश्न: मंत्री जी, बिहार के एक्सप्रेसवे को लेकर काफी चर्चा हो रही है। कौन-कौन सी प्रमुख एक्सप्रेसवे परियोजनाएं चल रही हैं या योजना में हैं, और इन्हें आप क्यों परिवर्तनकारी मानते हैं?

उत्तर: बिहार अब एक नए युग में प्रवेश कर रहा है। कुछ प्रमुख एक्सप्रेसवे और सड़क गलियारों में शामिल हैं:

बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेसवे का रूट अंतिम रूप से तय किया गया है। पहले इसे ग्रीनफील्ड परियोजना के रूप में सोचा गया था, लेकिन अब इसका अधिकांश भाग बक्सर, पटना, मोकामा और भागलपुर के बीच मौजूदा सड़कों को अपग्रेड कर बनाया जाएगा।

पटना–पूर्णिया एक्सप्रेसवे (लगभग 245 किमी) कई जिलों - वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा, सहरसा, मधेपुरा और पूर्णिया - से होकर गुज़रेगा। इसमें कई पुल, इंटरचेंज और उन्नत संरचनाएं शामिल हैं, जिससे यात्रा समय में भारी कमी आएगी।

पटना–आरा–सासाराम ग्रीनफील्ड/ब्राउनफील्ड कॉरिडोर, जिसे केंद्र सरकार की आर्थिक कार्य मंत्रिमंडल समिति (CCEA) ने HAM मॉडल के तहत ₹3,712.40 करोड़ की लागत से मंज़ूरी दी है।

रक्सौल–हल्दिया एक्सप्रेसवे भी प्रगति पर है। DPR स्वीकृत है और एलाइनमेंट कार्य जारी है। यह परियोजना बिहार को पूर्वी बंदरगाहों से जोड़ेगी और व्यापारिक गतिविधियों को गति देगी।

इन सभी एक्सप्रेसवे परियोजनाओं की खासियत यह है कि ये केवल दूरी कम नहीं करतीं - बल्कि पूरे राज्य को आर्थिक रूप से जोड़ती हैं, औद्योगिक गलियारे खोलती हैं, परिवहन लागत घटाती हैं और लोगों को अवसरों के करीब लाती हैं।

प्रश्न: आपने कई बार हाइब्रिड एन्‍यूटी मॉडल (HAM) की बात की है। बिहार में इसे कैसे अपनाया जा रहा है और इसके क्या लाभ व चुनौतियां हैं?

उत्तर: HAM मॉडल अब बिहार की प्रमुख सड़क और एक्सप्रेसवे परियोजनाओं का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। उदाहरण के लिए:

जेपी गंगा पथ का विस्तार (दिघा से कोईलवर, लगभग 35.65 किमी) HAM मॉडल के तहत किया जा रहा है।

गंगा किनारे दो एक्सप्रेसवे खंड - एक मोकामा-मुंगेर क्षेत्र (सफियाबाद से सुल्तानगंज) और दूसरा भागलपुर क्षेत्र (सुल्तानगंज से सबौर) - HAM मॉडल में स्वीकृत हैं, जिनकी कुल लागत करीब ₹9,970 करोड़ है।

पटना–आरा–सासाराम कॉरिडोर (120.10 किमी) को भी CCEA ने HAM मॉडल में मंज़ूरी दी है।

HAM के लाभ:

वित्तीय बोझ का बंटवारा - सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर लागत साझा करते हैं।

समय पर कार्य पूरा करने और रखरखाव की ज़िम्मेदारी निजी भागीदार की होती है, जिससे गुणवत्ता बनी रहती है।

यह मॉडल उन परियोजनाओं को भी गति देता है जो केवल सरकारी बजट से शुरू करना मुश्किल होता।

चुनौतियां:

भूमि अधिग्रहण में विलंब - मुआवज़ा और कानूनी प्रक्रियाएं समय लेती हैं।

योग्य ठेकेदारों की उपलब्धता जो दीर्घकालिक रखरखाव की जिम्मेदारी लेने को तैयार हों।

निर्माण और रखरखाव की गुणवत्ता सुनिश्चित करना - जिसके लिए निगरानी प्रणाली को सशक्त बनाया जा रहा है।

प्रश्न: आपने एआई आधारित ब्रिज हेल्थ मॉनिटरिंग की बात की थी। इसका वर्तमान स्टेटस क्या है?

उत्तर: बिहार इस दिशा में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो चुका है।

ब्रिज हेल्थ मॉनिटरिंग नीति 2025 को मंज़ूरी दी जा चुकी है, जिसमें ड्रोन, सेंसर और एआई/एमएल आधारित टूल्स से पुलों की संरचनात्मक स्थिति की निगरानी की जाएगी।

आईआईटी दिल्ली के साथ समझौता किया गया है, जिसके तहत 100 से अधिक राज्य अभियंताओं को एआई आधारित ब्रिज डिजाइन व मॉनिटरिंग पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

ड्रोन और LiDAR तकनीक से निरीक्षण, थर्मल इमेजिंग और उच्च-रिज़ॉल्यूशन स्कैनिंग की जा रही है। साथ ही ब्रिज हेल्थ इंडेक्स (BHI) के ज़रिए पुलों की सेहत का स्कोर तैयार किया जा रहा है, जिससे समय रहते मरम्मत या बंद करने का निर्णय लिया जा सके।

यह दर्शाता है कि बिहार केवल सड़कें नहीं बना रहा, बल्कि उनकी सुरक्षा, टिकाऊपन और रखरखाव पर भी गहरी नज़र रख रहा है।

प्रश्न: हाल के कुछ ऐसे प्रोजेक्ट जिनका काम पूरा हो चुका है या जिनका प्रभाव ज़मीन पर दिखने लगा है?

उत्तर: औंटा–सिमरिया पुल (बाराुणी-मोकामा छह लेन गंगा पुल) मई 2025 के आसपास पूरा हो गया है। लगभग 8 किमी लंबा यह केबल-स्टे पुल उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ता है और पुराने पुलों पर दबाव कम करता है।

मोकामा–मुंगेर ग्रीन अलाइनमेंट चार लेन राजमार्ग (NH-33, लगभग 82.40 किमी) के लिए ₹2,243.16 करोड़ की लागत से टेंडर आमंत्रित किए गए हैं। यह बक्सर–भागलपुर गलियारे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

इन परियोजनाओं से स्पष्ट है कि योजनाएं अब कागज से निकलकर धरातल पर उतर रही हैं।

प्रश्न: किसानों, व्यापारियों और आम नागरिकों को इससे क्या लाभ होंगे?

उत्तर: इन परियोजनाओं का प्रभाव व्यापक है:

किसानों के लिए: बाजार तक तेज़ पहुँच, उपज की बर्बादी में कमी, परिवहन लागत में कमी।

व्यवसायों के लिए: लॉजिस्टिक्स लागत में कमी, आपूर्ति श्रृंखला में सुधार। रक्सौल–हल्दिया जैसे एक्सप्रेसवे नेपाल और बंगाल के बंदरगाहों से बिहार के व्यापारिक जुड़ाव को मजबूत करेंगे।

साधारण नागरिकों के लिए: यात्रा समय में भारी कमी, सुरक्षा में सुधार, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार तक बेहतर पहुँच। औंटा–सिमरिया पुल जैसे प्रोजेक्ट से हजारों लोगों को सीधा लाभ होगा।

इसके अतिरिक्त, ईंधन की बचत, वाहन रखरखाव लागत में कमी, संपत्ति मूल्य में वृद्धि और औद्योगिक निवेश में बढ़ोतरी जैसी कई प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ सामने आएंगे।

प्रश्न: अब भी कौन-सी प्रमुख चुनौतियां हैं और सरकार उन्हें कैसे सुलझा रही है?

उत्तर: मुख्य चुनौतियां हैं:

भूमि अधिग्रहण में देरी - मुआवज़ा और कानूनी प्रक्रिया में समय लगता है।

प्रारंभिक लागत और फंडिंग की सीमाएं, विशेषकर भूमि और पुनर्वास से जुड़ी।

नई तकनीकों (एआई, ड्रोन, सेंसर आदि) के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन की कमी।

निर्माण गुणवत्ता और दीर्घकालिक रखरखाव सुनिश्चित करना।

इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार डिजिटल भूमि अधिग्रहण प्रणाली, पारदर्शी निविदा प्रक्रिया, क्षमता निर्माण कार्यक्रम और तकनीकी मॉनिटरिंग सिस्टम लागू कर रही है।

निष्कर्ष

बिहार की सड़क क्रांति केवल डामर बिछाने का कार्य नहीं है - यह कनेक्टिविटी, गति, सुरक्षा और सुशासन की कहानी है।

आधुनिक एक्सप्रेसवे, हाइब्रिड एन्‍यूटी मॉडल और एआई जैसी तकनीकों के संयोजन से बिहार विकास के एक नए दौर की ओर बढ़ रहा है। चुनौतियां हैं, लेकिन गति और संकल्प दोनों मौजूद हैं।

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