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केरल का Tintumon बना पेरिस का ‘जिबूम्बा’ – जिसने दुनिया को जोड़ा स्वाद और सादगी से

Updated on: 04 November, 2025 12:30 PM IST | Mumbai
Bespoke Stories Studio | bespokestories@mid-day.com

केरल के Tintumon ‘जिबूम्बा’ Thankachan ने पेरिस में भारतीय स्वाद और अपनापन को विश्वभर में पहुँचाया।

जिबूम्बा

जिबूम्बा

कहते हैं, अगर दिल में हौसला और जड़ों में अपनापन हो, तो दुनिया की कोई मंज़िल दूर नहीं होती। यही साबित किया है केरल के एक छोटे से गाँव से निकले Tintumon Pulickaparampil Thankachan ने, जिन्हें आज पूरी दुनिया प्यार से “जिबूम्बा” के नाम से जानती है।


यह कहानी सिर्फ एक इंसान की नहीं, बल्कि उस भावना की है जो अपने गाँव की खुशबू को सात समंदर पार लेकर जाती है। जिबूम्बा की यात्रा दिखाती है कि कैसे एक साधारण युवक अपनी संस्कृति, मेहनत और दिल की गर्मजोशी से ग्लोबल आइकॉन बन सकता है।

गाँव से शुरू हुआ सफ़र


केरल के हरे-भरे नारियल के पेड़ों के बीच Tintumon का बचपन बीता। उनके पिता एक साधारण किसान थे और माँ घर की रसोई में हर दिन स्वाद की नई कहानी रचती थीं। इन्हीं स्वादों और सादगी ने Tintumon को जीवन की असली पहचान दी - “अपनापन।”

पहला कदम उन्होंने उठाया Thekkady Wildlife Sanctuary में एक टूर गाइड के रूप में। वहीं से उनकी आँखों में नए सपनों की चमक आई। दुनियाभर के पर्यटकों से बातचीत करते हुए उन्हें एहसास हुआ कि हर इंसान के भीतर एक ‘घर’ होता है, और उसी एहसास को उन्होंने अपने जीवन का मिशन बना लिया।

नौकरी से लेकर नया रास्ता

Tintumon ने अपनी पढ़ाई पूरी कर फ्रेंच सीखी और फिर 2009 में कुवैत चले गए। वहाँ उन्होंने कॉर्पोरेट सेक्टर में जमकर मेहनत की, कई पुरस्कार जीते और एक स्थिर करियर बना लिया। पर दिल अब भी गाँव की गलियों में भटकता रहा। उन्हें हमेशा अपने देश की मिट्टी और उसके स्वाद की कमी महसूस होती थी।

उद्यमी बनने की शुरुआत

फिर एक दिन उन्होंने तय किया - अब वक्त है अपनी पहचान से कुछ बनाने का। उन्होंने कुवैत में ही एक रेस्टोरेंट शुरू किया जहाँ भारतीय और श्रीलंकाई फ्लेवर लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय हुए। उसी सफलता ने उन्हें पंख दिए और उन्होंने तय किया कि अब वो भारत का असली स्वाद लेकर पेरिस जाएंगे - दुनिया की फूड कैपिटल में।

पेरिस में गाँव की महक

पेरिस की गलियों में जब जिबूम्बा ने अपने रेस्टोरेंट “Gramam” की शुरुआत की, तो लोगों ने देखा कि ये सिर्फ खाना नहीं था, एक अनुभव था। हर डिश के पीछे एक कहानी थी - त्योहारों की, परिवार की, और उस प्यार की जो सिर्फ भारतीय रसोई में मिलता है।

फ्रेंच मीडिया ने उनकी इस सादगी भरी क्रांति को “फ्लेवर ऑफ होम” कहा। धीरे-धीरे जिबूम्बा सिर्फ एक रेस्टोरेंट नहीं, एक पहचान बन गया।

डिजिटल दुनिया का नया चेहरा

2025 में जिबूम्बा ने अपने जीवन का नया अध्याय शुरू किया - सोशल मीडिया के जरिए। उन्होंने अपने वीडियोज़ में हँसी, संस्कृति और जीवन के छोटे-छोटे पलों को बाँटना शुरू किया। उनकी सरलता और सकारात्मकता ने लाखों दिलों को छू लिया। आज उनके फॉलोअर्स सिर्फ भारत या फ्रांस में नहीं, बल्कि दुनिया के हर कोने में हैं। “जिबूम्बा” अब सिर्फ एक नाम नहीं, एक एक्सप्रेशन बन गया है - जो ऊर्जा, प्यार और असलीपन का प्रतीक है।

व्यवसाय से परे एक सोच

रेस्टोरेंट के अलावा उन्होंने Campus20 और Bluemoon Real Estate जैसे उपक्रम शुरू किए, पर हर काम के पीछे एक ही विचार रहा - अपनी जड़ों को दुनिया से जोड़ना। जिबूम्बा मानते हैं, “आप जहाँ भी जाओ, अगर दिल में अपनी मिट्टी की खुशबू हो, तो हर जगह घर जैसा लगता है।”

निष्कर्ष

Tintumon Pulickaparampil Thankachan यानी जिबूम्बा, उस नई भारत की तस्वीर हैं जो अपनी पहचान लेकर दुनिया में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने दिखाया कि ग्लोबल होने के लिए अपनी जड़ों को छोड़ना नहीं पड़ता - बल्कि वही जड़ें आपको ऊँचाई देती हैं।

आज पेरिस की सड़कों पर जब कोई मुस्कराते हुए कहता है, “जिबूम्बा!”, तो वो सिर्फ एक नाम नहीं पुकारता, बल्कि एक कहानी - केरल से आई, पर अब पूरे विश्व की बन चुकी।

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