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अमेरिका से अब तक 2,417 भारतीयों को किया निर्वासित किया

Updated on: 26 September, 2025 10:40 PM IST | Mumbai
Hindi Mid-day Online Correspondent | hmddigital@mid-day.com

यह मुद्दा तब सुर्खियों में आया जब अमेरिकी अधिकारियों ने पंजाब की 73 वर्षीय सिख महिला हरजीत कौर को भेज दिया.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल. फ़ाइल चित्र

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल. फ़ाइल चित्र

विदेश मंत्रालय (MEA) ने शुक्रवार को बताया कि जनवरी से अब तक 2,400 से ज़्यादा भारतीय नागरिकों को अमेरिका से निर्वासित किया जा चुका है. एक न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार यह मुद्दा हाल ही में तब सुर्खियों में आया जब अमेरिकी अधिकारियों ने पंजाब की 73 वर्षीय सिख महिला हरजीत कौर को वापस भेज दिया. हरजीत कौर तीन दशकों से अमेरिका में रह रही थीं. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत अवैध प्रवास का विरोध करता है और लोगों की आवाजाही के लिए कानूनी रास्ते अपनाने को बढ़ावा देता है.

रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कौर के मामले का भी ज़िक्र करते हुए कहा, "अमेरिका ने 20 जनवरी से 25 सितंबर के बीच कुल 2,417 भारतीय नागरिकों को निर्वासित किया है." जायसवाल ने कहा, "बिना किसी कानूनी दर्जे के किसी देश में रह रहे किसी भी व्यक्ति की भारतीय नागरिकता साबित हो जाने पर उसे वापस ले लिया जाता है. अमेरिका के मामले में भी यही स्थिति है."


उन्होंने आगे कहा, "हम प्रवास के लिए कानूनी रास्ते को बढ़ावा देना चाहते हैं. साथ ही, भारत अवैध प्रवास के खिलाफ है. जब भी किसी देश में कोई ऐसा व्यक्ति होता है जिसका कोई कानूनी दर्जा नहीं है और जिसे हमारे पास भेजा जाता है, तो हम उसकी पृष्ठभूमि की जाँच करते हैं और उसकी राष्ट्रीयता की पुष्टि करते हैं. पुष्टि हो जाने पर, हम उसे वापस ले सकते हैं. अमेरिका से निर्वासन के मामले में यही हो रहा है." रिपोर्ट के अनुसार वीज़ा धोखाधड़ी और ऐसे ही अन्य मामलों पर, उन्होंने कहा, "हम भारत से कानूनी प्रवास को बढ़ावा देना चाहते हैं, साथ ही अवैध प्रवास पर लगाम लगाना चाहते हैं, जो हमारे प्रयासों को कमज़ोर करता है." जायसवाल ने यह भी कहा कि भारत सरकार अवैध प्रवास और वीज़ा धोखाधड़ी को बढ़ावा देने वालों से निपटने के लिए राज्य के अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रही है. भारत ने नाटो प्रमुख के प्रधानमंत्री मोदी पर दावों को `पूरी तरह से निराधार` बताया



भारत ने शुक्रवार को नाटो महासचिव मार्क रूट की उस टिप्पणी को "पूरी तरह से निराधार" बताया, जिसमें कहा गया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूक्रेन पर रणनीति बनाने के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से संपर्क किया था, कथित तौर पर मास्को के साथ भारत के ऊर्जा संबंधों के कारण अमेरिका द्वारा लगाए गए दंडात्मक शुल्कों के प्रभाव के कारण. रिपोर्ट के मुताबिक विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "मोदी की बैठकों को गलत तरीके से पेश करने वाली या ऐसी बातचीत का संकेत देने वाली अटकलें या लापरवाही वाली टिप्पणियाँ अस्वीकार्य हैं जो कभी हुई ही नहीं." भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल की निरंतर खरीद पर, उन्होंने कहा, "इस मामले में कोई दोहरा मापदंड नहीं हो सकता," उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की हालिया टिप्पणियाँ यूरोपीय संघ और नाटो देशों के रूस के साथ ऊर्जा संबंधों के लिए आलोचनात्मक प्रतीत हुईं.

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान रूट ने सीएनएन को बताया कि भारत पर ट्रम्प के टैरिफ का रूस पर "बड़ा प्रभाव" पड़ रहा है और नई दिल्ली पुतिन से फ़ोन पर बात कर रही है. नाटो प्रमुख ने दावा किया, "और नरेंद्र मोदी उनसे यूक्रेन पर अपनी रणनीति समझाने के लिए कह रहे हैं क्योंकि भारत पर टैरिफ का असर पड़ रहा है."


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