Updated on: 19 August, 2025 06:23 PM IST | Mumbai
Hindi Mid-day Online Correspondent
यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा टैरिफ दोगुना कर दिए जाने के बाद भारत और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ गया है.
विदेश मंत्री एस जयशंकर मंगलवार को मॉस्को की तीन दिवसीय यात्रा पर रवाना हुए. फ़ाइल तस्वीर
विदेश मंत्री एस जयशंकर मंगलवार को "समय की कसौटी पर खरी उतरी" भारत-रूस साझेदारी को और मज़बूत करने के लिए मास्को की तीन दिवसीय यात्रा पर रवाना हुए. एक न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ दोगुना करके 50 प्रतिशत कर दिए जाने के बाद भारत और अमेरिका के बीच संबंधों में तनाव बढ़ गया है. इस टैरिफ में रूसी कच्चे तेल की ख़रीद पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त जुर्माना भी शामिल है. विदेश मंत्रालय (MEA) ने जयशंकर की यात्रा की घोषणा करते हुए कहा कि वह बुधवार को आयोजित होने वाले भारत-रूस अंतर-सरकारी व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग आयोग (IRIGC-TEC) के 26वें सत्र की सह-अध्यक्षता करेंगे.
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रिपोर्ट के मुताबिक विदेश मंत्री और रूस के प्रथम उप-प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव IRIGC-TEC की सह-अध्यक्षता करेंगे, जिससे इस वर्ष के अंत में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा की नींव रखने की उम्मीद है. जयशंकर और उनके रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव के यूक्रेन में शांति लाने के लिए ट्रम्प प्रशासन की नवीनतम पहलों पर भी चर्चा करने की उम्मीद है.
विदेश मंत्रालय ने एक संक्षिप्त बयान में कहा कि इस यात्रा के दौरान, विदेश मंत्री द्विपक्षीय एजेंडे की समीक्षा करेंगे और रूसी विदेश मंत्री के साथ क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर अपने विचार साझा करेंगे. रिपोर्ट के अनुसार इस यात्रा का उद्देश्य दीर्घकालिक और समय-परीक्षित भारत-रूस विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और मज़बूत करना है.
यह उम्मीद की जा रही है कि जयशंकर की मॉस्को यात्रा के दौरान दोनों पक्ष भारत-रूस ऊर्जा संबंधों पर भी विचार-विमर्श करेंगे. रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने इस महीने एक कार्यकारी आदेश जारी किया था जिसमें नई दिल्ली द्वारा रूसी तेल की निरंतर खरीद के दंड के रूप में भारतीय वस्तुओं पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया गया था.
रूसी कच्चे तेल की अपनी खरीद का बचाव करते हुए, भारत यह कहता रहा है कि उसकी ऊर्जा खरीद राष्ट्रीय हित और बाजार की गतिशीलता से प्रेरित है.फरवरी 2022 में यूक्रेन पर आक्रमण के बाद पश्चिमी देशों द्वारा मास्को पर प्रतिबंध लगाने और उसकी आपूर्ति बंद करने के बाद, भारत ने छूट पर बेचे जाने वाले रूसी तेल की खरीदारी शुरू कर दी. परिणामस्वरूप, 2019-20 में कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी मात्र 1.7 प्रतिशत से बढ़कर 2024-25 में 35.1 प्रतिशत हो गई और अब यह भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता है. जयशंकर की मास्को यात्रा के दौरान, दोनों पक्षों के यूक्रेन संघर्ष पर भी विचार-विमर्श करने की संभावना है. भारत लगातार बातचीत और कूटनीति के माध्यम से रूस-यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने का आह्वान करता रहा है.
पिछले साल जुलाई में, प्रधानमंत्री मोदी ने मास्को की यात्रा की और पुतिन से कहा कि यूक्रेन संघर्ष का समाधान युद्ध के मैदान में संभव नहीं है और बम-गोली के बीच शांति प्रयास सफल नहीं होते. अगले महीने मोदी ने यूक्रेन की राजधानी कीव का दौरा किया और राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की से कहा कि यूक्रेन और रूस को युद्ध समाप्त करने के लिए बिना समय बर्बाद किये एक साथ बैठना चाहिए.
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