Updated on: 23 September, 2025 11:11 PM IST | Mumbai
Hindi Mid-day Online Correspondent
वायु रक्षा प्रणालियों पर एक सम्मेलन में एयर मार्शल राकेश सिन्हा ने ऑपरेशन सिंदूर से सीखे गए सबक और सैन्य सोच एवं योजना में प्रतिद्वंद्वी से "आगे रहने" की आवश्यकता पर भी बात की.
प्रतीकात्मक चित्र. तस्वीर/पिक्साबे
एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि सशस्त्र बल अक्टूबर के पहले सप्ताह में मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ (एचक्यू आईडीएस) द्वारा आयोजित अभ्यास के दौरान अपने कुछ ड्रोन और ड्रोन-रोधी प्रणालियों की क्षमताओं का परीक्षण करेंगे. सूत्रों ने बताया कि यह अभ्यास 6 से 10 अक्टूबर तक मध्य प्रदेश में कहीं आयोजित किया जाएगा. एक न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार वायु रक्षा प्रणालियों पर एक सम्मेलन में अपने संबोधन में, मुख्यालय आईडीएस में एकीकृत रक्षा स्टाफ (ओपीएस) के उप प्रमुख, एयर मार्शल राकेश सिन्हा ने ऑपरेशन सिंदूर से सीखे गए सबक और सैन्य सोच एवं योजना में प्रतिद्वंद्वी से "आगे रहने" की आवश्यकता पर भी बात की.
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रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में आयोजित इस सम्मेलन का विषय `काउंटर यूएवी और वायु रक्षा प्रणालियाँ: आधुनिक युद्ध का भविष्य` था और इसमें वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों, रक्षा उद्योग की विभिन्न कंपनियों के प्रतिनिधियों और क्षेत्र के विशेषज्ञों ने भाग लिया.मुख्यालय आईडीएस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस अभ्यास का नाम `कोल्ड स्टार्ट` है. बाद में, कार्यक्रम से इतर पीटीआई से बातचीत करते हुए, एयर मार्शल सिन्हा ने कहा कि यह अभ्यास मध्य क्षेत्र में आयोजित किया जाएगा और इसमें तीनों सेनाएँ भाग लेंगी. इसके अलावा, उद्योग भागीदार, अनुसंधान एवं विकास भागीदार, शिक्षा जगत और अन्य लोग भी आगामी अभ्यास में भाग लेंगे. एयर मार्शल सिन्हा ने कहा, "हम इस अभ्यास के दौरान अपने कुछ ड्रोन और ड्रोन-रोधी प्रणालियों का परीक्षण करेंगे... जिसका उद्देश्य एक अधिक मज़बूत वायु रक्षा प्रणाली और काउंटर-यूएएस तैयार करना है."
काउंटर-यूएएस का अर्थ है मानवरहित हवाई प्रणालियों का मुकाबला. रिपोर्ट के अनुसार यह अभ्यास `रण संवाद` के लगभग एक महीने बाद हो रहा है - युद्ध, युद्ध और युद्ध-लड़ाई पर अपनी तरह का पहला त्रि-सेवा सेमिनार, जो मध्य प्रदेश के महू स्थित आर्मी वॉर कॉलेज में आयोजित किया गया था. 27 अगस्त को सैन्य संगोष्ठी में पूर्ण भाषण देते हुए, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नए नवाचारों और अप्रत्याशित चुनौतियों के लिए तैयार रहने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया और साथ ही मौजूदा तकनीकों में महारत हासिल करते हुए समय से आगे रहने की आवश्यकता पर बल दिया.
उन्होंने आधुनिक युद्धों की बढ़ती जटिलता और अप्रत्याशितता के पीछे तकनीक और आश्चर्य के सम्मिश्रण को मुख्य कारण बताया. रिपोर्ट के मुताबिक सिंह ने कहा, "भविष्य के युद्ध केवल हथियारों की लड़ाई नहीं होंगे; वे तकनीक, बुद्धिमत्ता, अर्थव्यवस्था और कूटनीति का संयुक्त खेल होंगे. जो राष्ट्र तकनीक, रणनीति और अनुकूलनशीलता के त्रिकोण में निपुण होगा, वही सच्ची वैश्विक शक्ति के रूप में उभरेगा. यह इतिहास से सीखने और एक नया इतिहास लिखने का समय है. यह भविष्य का अनुमान लगाने और उसे आकार देने का समय है".
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