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भारत को परमाणु बम बनाने में झारखंड देगा यूरेनियम

Updated on: 19 September, 2025 06:48 PM IST | Mumbai
Hindi Mid-day Online Correspondent | hmddigital@mid-day.com

यहाँ डिफेंस ईस्ट टेक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए, सोरेन ने कहा कि आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र के साथ सहयोग को तैयार है.

हेमंत सोरेन. तस्वीर/पीटीआई

हेमंत सोरेन. तस्वीर/पीटीआई

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शुक्रवार को कहा कि राज्य यूरेनियम से समृद्ध है और परमाणु हथियारों के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है. एक न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार यहाँ डिफेंस ईस्ट टेक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए, सोरेन ने कहा कि उनकी सरकार रक्षा क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र के साथ पूर्ण सहयोग करने को तैयार है. सोरेन ने कहा, "झारखंड यूरेनियम से समृद्ध है और परमाणु हथियार निर्माण में योगदान दे सकता है. राज्य सरकार रक्षा क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र के साथ पूर्ण सहयोग करने को तैयार है." परमाणु हथियारों के विकास के लिए यूरेनियम एक महत्वपूर्ण घटक है.

रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में विमानन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होने वाला नोएडा हवाई अड्डा, जिसे जेवर हवाई अड्डा भी कहा जाता है, 30 अक्टूबर को उद्घाटन के लिए तैयार है. भारतीय विमानन क्षेत्र को एक बड़ा बढ़ावा देते हुए, नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान संचालन 45 दिनों के भीतर शुरू होने की उम्मीद है, जो पहले चरण में बेंगलुरु, मुंबई, हैदराबाद और कोलकाता सहित कम से कम 10 प्रमुख शहरों को जोड़ेगा.


केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू ने गुरुवार को नोएडा हवाई अड्डे के उद्घाटन के बारे में बताते हुए कहा, "जेवर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का उद्घाटन 30 अक्टूबर 2025 को होगा और उस तारीख से 45 दिनों के भीतर, हम परिचालन शुरू होते देख सकते हैं." रिपोर्ट के अनुसार हवाई अड्डे के पहले चरण में एक रनवे और एक टर्मिनल होगा जो सालाना 1.2 करोड़ यात्रियों को संभालने में सक्षम होगा, और इसे चार चरणों में 7 करोड़ यात्रियों तक विस्तारित करने की क्षमता है.



दिल्ली से 75 किलोमीटर दूर स्थित, यह इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के बाद एनसीआर का दूसरा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा होगा, जो पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए कनेक्टिविटी को बढ़ावा देगा. रिपोर्ट के मुताबिक जल्द ही शुरू होने वाला, नोएडा का यह हवाई अड्डा कार्गो संचालन के लिए एक रणनीतिक केंद्र बनने की उम्मीद है, जिससे रसद और आर्थिक विकास में वृद्धि होगी और साथ ही नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भार भी कम होगा.

यह हवाई अड्डा छह सड़कों, रैपिड रेल-सह-मेट्रो और पॉड टैक्सियों से जुड़ा है; इसमें कम दृश्यता में संचालन के लिए CAT-III B इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम लगा है. जेवर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का विकास उत्तर प्रदेश सरकार और ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी के साथ सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से किया गया है.


जेवर हवाई अड्डे से रियल एस्टेट विकास को बढ़ावा मिलने और लगभग एक लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है.यह देखते हुए कि जेवर हवाई अड्डा दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर दबाव कम करेगा और क्षेत्रीय विमानन को बढ़ावा देगा, आधुनिक विमानन बुनियादी ढाँचा नोएडा और गुड़गांव के बीच यातायात की भीड़भाड़ को भी कम करेगा.यह देखते हुए कि जेवर हवाई अड्डे को इतनी कुशलता से बनाया गया है कि यह एक साथ बड़ी संख्या में उड़ानों को संभाल सकता है, यह दिल्ली के लोगों को दुनिया भर में यात्रा करते समय राहत की सांस देने के लिए तैयार है.

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