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लद्दाख में हिंसा के बाद ढील की मांग, अनावश्यक आवाजाही पर प्रतिबंध

Updated on: 27 September, 2025 05:39 PM IST | Mumbai
Hindi Mid-day Online Correspondent | hmddigital@mid-day.com

स्थानीय लोगों ने अपनी पीड़ा बताते हुए अब सरकार से प्रतिबंध हटाने की गुहार लगाई है. उन्होंने कहा कि वे भोजन और दूध जैसी बुनियादी चीज़ें भी नहीं खरीद पा रहे हैं.

प्रतीकात्मक छवि

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लद्दाख में बढ़ते तनाव के बीच, हालात अभी भी सामान्य होते नहीं दिख रहे हैं. 24 सितंबर को लद्दाख के लेह में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शन के बाद, प्रशासन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत अनावश्यक आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया था. एक न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार स्थानीय लोगों ने अपनी पीड़ा बताते हुए अब सरकार से प्रतिबंध हटाने की गुहार लगाई है. उन्होंने कहा कि वे भोजन और दूध जैसी बुनियादी चीज़ें भी नहीं खरीद पा रहे हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक लद्दाख के लेह की एक बुज़ुर्ग महिला डोल्मा ने बताया कि इस तनावपूर्ण स्थिति के बीच, वह पाँच दिनों के इंतज़ार के बाद दूध खरीद पाईं. बुज़ुर्ग महिला प्रशासन से दिन में कम से कम एक घंटे के लिए प्रतिबंध हटाने का आग्रह कर रही हैं ताकि लोग ज़रूरी चीज़ें खरीद सकें. मीडिया से बात करते हुए, महिला ने कहा, "यह पोलो ग्राउंड इलाका है. मैं पाँच दिन बाद दूध खरीद रही हूँ. 24 तारीख के बाद से हम कुछ भी नहीं खरीद पाए हैं. बड़े लोग तो खाना खा सकते हैं, लेकिन उन बच्चों के लिए मुश्किल है जो पूरी तरह दूध पर निर्भर हैं. धीरे-धीरे सब कुछ सामान्य हो जाएगा, लेकिन हमें नहीं पता." समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार. उन्होंने आगे कहा, "हमारे घर में सब्ज़ियाँ और दूध नहीं है. ख़ासकर दिहाड़ी मज़दूरों और पर्यटकों के लिए तो यह बहुत मुश्किल है. हम ख़ुद लाचार हैं. उन्हें कम से कम एक घंटे के लिए प्रतिबंध हटाने चाहिए. वरना लोग क्या करेंगे? वे क्या खाएँगे?"


लेह के एक अन्य निवासी, राजेंद्र सिंह, जो मूल रूप से जम्मू के रहने वाले हैं, ने कहा कि हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद प्रशासन द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के कारण, वे पाँच दिनों के इंतज़ार के बाद दूध खरीद पाए. रिपोर्ट के अनुसार  सिंह ने आगे कहा, "हमें पाँच दिनों के बाद दूध मिल रहा है. हमें सामान नहीं मिल रहा है. मैं सरकार से अनुरोध करता हूँ कि वह हर दिन कर्फ्यू में एक घंटे की ढील दे ताकि हम खाना खरीद सकें. मैं जम्मू से हूँ, लेकिन यहाँ किराए पर रह रहा हूँ". जबकि स्थानीय लोग अपने दैनिक जीवन को जारी रखने का प्रयास कर रहे हैं, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत लगाए गए कड़े प्रतिबंध लोगों के जीवन को और भी कठिन बना रहे हैं. 24 सितंबर को हुए हिंसक विरोध प्रदर्शन के बाद लेह में प्रतिबंध लगाए गए हैं और सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई है, जहाँ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कार्यालय में आग लगा दी गई थी.



इससे पहले 26 सितंबर को, राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के प्रावधानों के तहत जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हिरासत ने भी पूरे केंद्र शासित प्रदेश में बड़े पैमाने पर विवाद खड़ा कर दिया था. रिपोर्ट के मुताबिक 24 सितंबर को लेह में विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया, जिसके बाद इलाके में भाजपा कार्यालय में आग लगा दी गई. हिंसक विरोध प्रदर्शनों में चार लोगों की मौत के दो दिन बाद, वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के प्रावधानों के तहत हिरासत में लिया गया. जलवायु कार्यकर्ता पर "हिंसा भड़काने" का आरोप लगाया गया है.


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