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उत्तर प्रदेश में `आई लव मुहम्मद` विवाद में हिंसा के बाद लाठीचार्ज, हिरासत में दर्जनों लोग

Updated on: 27 September, 2025 08:19 PM IST | Mumbai
Hindi Mid-day Online Correspondent | hmddigital@mid-day.com

पुलिस ने बताया कि शुक्रवार की नमाज़ के बाद, कोतवाली क्षेत्र में "आई लव मुहम्मद" के पोस्टर लिए एक बड़ी भीड़ जमा हो गई और लोगों ने प्रदर्शन स्थगित किए जाने पर अपना गुस्सा ज़ाहिर किया.

प्रतीकात्मक चित्र. तस्वीर/आईस्टॉक

प्रतीकात्मक चित्र. तस्वीर/आईस्टॉक

मौलवी और इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल के प्रमुख तौकीर रज़ा खान द्वारा "आई लव मुहम्मद" अभियान के समर्थन में प्रस्तावित प्रदर्शन को स्थगित करने की घोषणा के बाद शुक्रवार को बरेली की एक मस्जिद के बाहर एक बड़ी भीड़ और पुलिस के बीच झड़प हो गई. एक न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार अधिकारियों ने बताया कि पुलिस ने दो दर्जन से ज़्यादा लोगों को हिरासत में लिया है. पुलिस ने बताया कि शुक्रवार की नमाज़ के बाद, मौलवी के आवास के बाहर और कोतवाली क्षेत्र में स्थित मस्जिद के पास, "आई लव मुहम्मद" के पोस्टर लिए एक बड़ी भीड़ जमा हो गई और लोगों ने प्रदर्शन स्थगित किए जाने पर अपना गुस्सा ज़ाहिर किया. सूत्रों ने बताया कि खान ने आखिरी समय में प्रदर्शन रद्द करने की घोषणा करते हुए कहा कि अधिकारियों ने इसकी अनुमति नहीं दी है. इस बीच, ज़िला मजिस्ट्रेट अविनाश सिंह ने कहा, "कुछ दिन पहले, एक संगठन ने शुक्रवार को एक मार्च निकालने और विरोध प्रदर्शन के समर्थन में एक ज्ञापन सौंपने का प्रस्ताव रखा था. हमने उन्हें सूचित किया था कि अगर उन्हें ऐसा कोई कदम उठाना है, तो उन्हें पहले लिखित अनुमति लेनी होगी क्योंकि बीएनएसएस की धारा 163 (उपद्रव या संभावित खतरे के तत्काल मामलों में आदेश जारी करने की शक्ति) पूरे ज़िले में लागू है."  उन्होंने आगे कहा कि इसके बावजूद, शुक्रवार की नमाज़ के बाद, कुछ लोग कुछ इलाकों में सड़कों पर उतर आए और शांति भंग करने की कोशिश की. 

रिपोर्ट के मुताबिक डीएम ने कहा, "जवाब में, पुलिस ने मौके पर कड़ी कार्रवाई की. स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है. मैं सभी से अनुरोध करता हूँ कि किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें." उत्तर प्रदेश सरकार के सूचना विभाग द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि बरेली हिंसा एक सुनियोजित साज़िश थी. बयान में कहा गया है, "साजिश का उद्देश्य पश्चिम (पश्चिमी उत्तर प्रदेश) में उद्योग और प्रगति के खिलाफ नकारात्मक माहौल बनाना था. दंगों का इस्तेमाल नोएडा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले को कमजोर करने और यह दिखाने के लिए किया गया कि उत्तर प्रदेश अभी भी असुरक्षित है. इससे उत्तर प्रदेश में विदेशी निवेश नहीं आएगा और योगी आदित्यनाथ सरकार के पश्चिम में नोएडा जैसे और अधिक उच्च तकनीक वाले औद्योगिक शहर विकसित करने के प्रयासों को झटका लगेगा." राज्य सरकार बरेली हिंसा के पीछे की साजिश की जाँच कर रही है.


 बयान में कहा गया है कि अफवाह फैलाने वालों को कानून के अनुसार दंडित किया जाएगा. गुरुवार को, मौलवी ने चेतावनी दी थी कि प्रदर्शन किसी भी कीमत पर जारी रहेगा. रिपोर्ट के मुताबिक खान दो दशकों से अधिक समय से राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं और बरेली और आसपास के जिलों में उनका कुछ प्रभाव है. वह सुन्नी इस्लाम के बरेलवी संप्रदाय के संस्थापक अहमद रज़ा खान के प्रत्यक्ष वंशज भी हैं - जो उपमहाद्वीप के सबसे प्रमुख संप्रदायों में से एक है. शहर के मध्य में इस्लामिया मैदान से सटी एक छोटी मस्जिद के बाहर और बरेलवी संप्रदाय के अनुयायियों के लिए सबसे प्रतिष्ठित दरगाह-ए-आला हज़रत के पास हिंसा भड़क उठी. जैसे ही भीड़ ने इस्लामिया इंटर कॉलेज मैदान की ओर बढ़ने की कोशिश की, पुलिस ने खलील तिराहा पर उन्हें रोकने की कोशिश की, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया और वाहनों व दुकानों में तोड़फोड़ की, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई. इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक घायल हुए लोगों की संख्या के बारे में कोई आधिकारिक आंकड़े उपलब्ध नहीं थे, हालाँकि तस्वीरों में टूटे हुए शीशे, बिखरे हुए जूते और सड़कों पर पत्थर दिखाई दे रहे थे क्योंकि दंगा-रोधी उपकरणों से लैस पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग किया था.



डीआईजी अजय कुमार साहनी ने संवाददाताओं को बताया कि शुक्रवार की नमाज से दो दिन पहले से पुलिस धार्मिक नेताओं के संपर्क में थी, जो ज़्यादातर इलाकों में शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई. कुछ शरारती तत्व नारे लगाते और पुलिस पर पथराव करते पाए गए. जवाबी कार्रवाई में हल्का बल प्रयोग किया गया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. रिपोर्ट के मुताबिक डीआईजी ने कहा, "एफआईआर दर्ज की जा रही हैं." जिस तरह से भीड़ बैनर लेकर निकली और पथराव किया, उससे एक सुनियोजित साजिश का संकेत मिलता है. घटना के वीडियो और तस्वीरों के आधार पर इसमें शामिल सभी लोगों की पहचान की जाएगी और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी," अधिकारी ने आगे कहा और "कड़ी सज़ा" देने का वादा किया ताकि ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो. 

स्थानीय लोगों ने बताया कि हिंसा के बाद आलमगिरीगंज, बांसमंडी, सिविल लाइंस, बड़ा बाजार, कुतुबखाना और बिहारीपुर सहित कई इलाकों में दुकानें बंद होने से दहशत फैल गई. आजमनगर और कुमार टॉकीज के पास से भी पथराव की खबरें आईं. डीआईजी, एसएसपी अनुराग आर्य और डीएम समेत वरिष्ठ अधिकारी स्थिति पर नजर रखने के लिए कोतवाली इलाके में डेरा डाले रहे.


डीएम ने संवाददाताओं से कहा, "स्थिति अब नियंत्रण में है. किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है. हम लोगों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील कर रहे हैं." भारी पुलिस बल की तैनाती ने शहर के बड़े हिस्से को एक तरह के किले में तब्दील कर दिया है और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की गई है. इस विवाद की शुरुआत 9 सितंबर को हुई थी, जब कानपुर पुलिस ने बारावफात के जुलूस के दौरान सार्वजनिक सड़क पर "आई लव मुहम्मद" लिखे बोर्ड लगाने के आरोप में नौ नामजद और 15 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी. हिंदू समूहों ने इसका विरोध किया और इसे "परंपरा से विचलन" और "जानबूझकर उकसाने वाला" बताया. यह विवाद जल्द ही उत्तर प्रदेश के कई जिलों और उत्तराखंड व कर्नाटक जैसे राज्यों में फैल गया, जिसके कारण विरोध प्रदर्शन हुए और पुलिस ने कार्रवाई की. इस विवाद ने एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का भी ध्यान खींचा, जिन्होंने कहा कि "आई लव मुहम्मद" कहना कोई अपराध नहीं है.

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