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प्रधानमंत्री मोदी ने की RSS की तारीफ, कहा- `चुनौतियों के बावजूद मजबूती से खड़ा`

Updated on: 01 October, 2025 06:45 PM IST | Mumbai
Hindi Mid-day Online Correspondent | hmddigital@mid-day.com

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक डाक टिकट जारी करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि संघ के स्वयंसेवक राष्ट्र सेवा और समाज को सशक्त बनाने के लिए अथक प्रयास करते रहे हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तस्वीर/पीटीआई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तस्वीर/पीटीआई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को ज़ोर देकर कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) समाज के विभिन्न वर्गों के साथ मिलकर काम करता है, लेकिन इसकी विभिन्न शाखाओं के बीच कभी कोई विरोधाभास नहीं होता क्योंकि ये सभी राष्ट्र प्रथम के सिद्धांत पर काम करते हैं. एक न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक डाक टिकट जारी करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि संघ के स्वयंसेवक राष्ट्र सेवा और समाज को सशक्त बनाने के लिए अथक प्रयास करते रहे हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा, "आज जारी किया गया स्मारक डाक टिकट एक श्रद्धांजलि है, जो 1963 के गणतंत्र दिवस परेड में गर्व से मार्च करने वाले आरएसएस स्वयंसेवकों को याद करता है. अपनी स्थापना के बाद से, आरएसएस ने राष्ट्र निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया है. आरएसएस समाज के विभिन्न वर्गों के साथ मिलकर काम करता है, लेकिन इसकी विभिन्न शाखाओं के बीच कभी कोई विरोधाभास नहीं होता क्योंकि ये सभी राष्ट्र प्रथम के सिद्धांत पर काम करते हैं."


मोदी ने ज़ोर देकर कहा कि आरएसएस `एक भारत, श्रेष्ठ भारत` में विश्वास करता है, फिर भी आज़ादी के बाद इसे राष्ट्रीय मुख्यधारा में शामिल होने से रोकने के प्रयास किए गए. रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने आगे कहा, "विविधता में एकता हमेशा से भारत की आत्मा रही है. अगर यह सिद्धांत टूटा तो भारत कमज़ोर हो जाएगा. चुनौतियों के बावजूद, आरएसएस मज़बूती से खड़ा है और अथक परिश्रम से राष्ट्र की सेवा कर रहा है."



केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा 1925 में नागपुर में स्थापित, आरएसएस की स्थापना एक स्वयंसेवी संगठन के रूप में हुई थी जिसका उद्देश्य नागरिकों में सांस्कृतिक जागरूकता, अनुशासन, सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व को बढ़ावा देना था. रिपोर्ट के मुताबिक मोदी स्वयं एक आरएसएस प्रचारक थे और भाजपा में आने से पहले उन्होंने एक कुशल संगठनकर्ता के रूप में अपनी पहचान बनाई थी. भाजपा की वैचारिक प्रेरणा हिंदुत्ववादी संगठन से मिलती है.


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