Updated on: 31 May, 2025 09:07 PM IST | Mumbai
Hindi Mid-day Online Correspondent
भोपाल में पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि शक्ति की पूजा करते समय, हम सिंदूर चढ़ाते हैं, जो अब भारत की बहादुरी का प्रतीक है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने `महिला सशक्तिकरण महासम्मेलन` को संबोधित किया. तस्वीर/पीटीआई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान महिला कर्मियों के योगदान को स्वीकार करते हुए कहा कि सीमा सुरक्षा बल की `बहादुर बेटियों` ने असाधारण बहादुरी का परिचय दिया. एक न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार भोपाल में `लोकमाता देवी अहिल्याबाई महिला सशक्तिकरण महासम्मेलन` के दौरान बोलते हुए, पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि शक्ति की पूजा करते समय, हम सिंदूर चढ़ाते हैं, जो अब भारत की बहादुरी का प्रतीक है. उन्होंने कहा, "पहलगाम में, आतंकवादियों ने न केवल भारतीयों का खून बहाया, बल्कि उन्होंने हमारी संस्कृति पर भी हमला किया. उन्होंने हमारे समाज को विभाजित करने की कोशिश की. इन आतंकवादियों ने भारत की महिला शक्ति को चुनौती दी है, एक चुनौती जो अब आतंकवादियों और उनके आकाओं के लिए एक दुःस्वप्न में बदल गई है. ऑपरेशन सिंदूर भारत का सबसे बड़ा और सबसे सफल आतंकवाद विरोधी अभियान है. हमारी सेना ने उन जगहों पर आतंकवादी ठिकानों को नष्ट कर दिया, जिनकी पाकिस्तान की सेना ने कभी कल्पना भी नहीं की थी. इस ऑपरेशन ने यह स्पष्ट कर दिया कि आतंकवाद के माध्यम से छद्म युद्ध अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. अब, हम दुश्मन के इलाके में भी हमला करेंगे, और आतंकवादियों का समर्थन करने वालों को भी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी."
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रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने आगे जोर देकर कहा कि ऑपरेशन सिंधुर अब भारत की `नारी शक्ति` का प्रतीक बन गया है. उन्होंने कहा, "अब 140 करोड़ भारतीय कह रहे हैं: अगर गोली चलाओगे तो बम से जवाब देने के लिए तैयार रहो. ऑपरेशन सिंधुर भी `नारी शक्ति` का प्रतीक बन गया है. हम सभी जानते हैं कि इस ऑपरेशन में BSF (सीमा सुरक्षा बल) की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण थी. BSF की बेटियाँ जम्मू से लेकर पंजाब, राजस्थान और गुजरात की सीमा पर अग्रिम मोर्चे पर डटी रहीं. उन्होंने सीमा पार से होने वाली गोलीबारी का कड़ा जवाब दिया. कमांड और कंट्रोल सेंटर से लेकर दुश्मन की चौकियों को नष्ट करने तक, BSF की बहादुर बेटियों ने असाधारण वीरता का परिचय दिया."
पीएम मोदी ने कहा, "पहली बार सैनिक स्कूलों के दरवाजे लड़कियों के लिए खोले गए हैं. 2014 से पहले एनसीसी कैडेटों में केवल 25 फीसदी लड़कियां थीं, लेकिन अब यह संख्या 50 फीसदी की ओर बढ़ रही है. महिला कैडेटों का पहला बैच राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) से पास आउट हो चुका है. आज महिलाओं को सेना, नौसेना और वायु सेना में अग्रिम मोर्चे पर तैनात किया जा रहा है." रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, "लड़ाकू विमान उड़ाने से लेकर आईएनएस विक्रांत पर सेवा देने तक, महिला अधिकारी असाधारण बहादुरी का प्रदर्शन कर रही हैं."
उन्होंने महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए सरकार की पहल पर जोर दिया, उन्होंने उस समय को भी याद किया जब महिलाओं को नई तकनीकों से दूर रखा जाता था. रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा, "लेकिन आज सरकार प्रयास कर रही है कि हमारी महिलाएं आधुनिक तकनीक में आगे बढ़ें. कृषि में ड्रोन क्रांति हो रही है. नमो ड्रोन दीदी पहल के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं का आत्मविश्वास और आय बढ़ रही है. आज बड़ी संख्या में हमारी बेटियां डॉक्टर, इंजीनियर और वैज्ञानिक बन रही हैं. हमारे सभी प्रमुख अंतरिक्ष मिशनों में हमारी माताएं और बहनें वैज्ञानिक के रूप में काम कर रही हैं. चंद्रयान-3 मिशन में 100 से अधिक महिला वैज्ञानिक और इंजीनियर शामिल थीं."
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