Updated on: 25 September, 2025 05:46 PM IST | Mumbai
Hindi Mid-day Online Correspondent
उन्होंने आगे कहा कि जो लोग सोचते हैं कि नेपाल में जो हुआ, वह यहाँ भी होगा, उन्हें पड़ोसी देश चले जाना चाहिए.
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस. फाइल फोटो
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए उम्र सिर्फ़ एक संख्या है और उन्हें तब तक देश का नेतृत्व करते रहना चाहिए जब तक उनमें क्षमता है. एक न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने आगे कहा कि जो लोग सोचते हैं कि नेपाल में जो हुआ, वह यहाँ भी होगा, उन्हें पड़ोसी देश चले जाना चाहिए.
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रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी 17 सितंबर को 75 वर्ष के हो गए. जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के बाद वे भारत के तीसरे सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले प्रधानमंत्री हैं और निर्बाध कार्यकाल के मामले में दूसरे स्थान पर हैं. मोदी को एक दूरदर्शी और कुशल नेता बताते हुए, फडणवीस ने कहा, "उनकी शारीरिक और मानसिक क्षमता को देखते हुए, उम्र उनके लिए सिर्फ़ एक संख्या है. उम्र का कारक कब मायने रखता है - जब आपकी शारीरिक और मानसिक क्षमताएँ कम हो जाती हैं... लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के साथ ऐसा नहीं है. उन्हें तब तक हमारा नेतृत्व करते रहना चाहिए जब तक उनमें क्षमता है."
अपने बारे में बात करते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि ब्राह्मण होना उनके राजनीतिक मार्ग में कोई बाधा नहीं है और उनका भविष्य भाजपा तय करेगी. रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, "पूरा महाराष्ट्र मेरी जाति जानता है और उन्होंने मुझे स्वीकार किया है. 2014 में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुझे राज्य की बागडोर सौंपी और उसके बाद के तीन चुनावों में, मेरे नेतृत्व में भाजपा ने 100 से ज़्यादा सीटें जीती हैं. इसलिए जाति का मुद्दा, जिसे राजनीति में नकारात्मक माना जाता था, अब सुलझ गया है."
जब उनसे पूछा गया कि क्या वह राष्ट्रीय स्तर पर कोई भूमिका निभाएँगे, तो फडणवीस ने कहा कि वह पाँच साल के मौजूदा कार्यकाल तक राज्य का नेतृत्व करते रहेंगे, जिसके बाद पार्टी उनके भविष्य के बारे में फैसला करेगी. हाल ही में अखबारों में छपे "देवभाऊ" विज्ञापनों के बारे में पूछे जाने पर, उन्होंने कहा कि भाजपा ने यह दिखाने के लिए इसे प्रकाशित किया था कि राज्य छत्रपति शिवाजी महाराज के आदर्शों के अनुसार काम कर रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा, "विज्ञापन में क्या दिखाया गया? यह कि मैं उस महान योद्धा राजा को पुष्पांजलि अर्पित कर रहा हूँ जिन्होंने किसी भी समुदाय के साथ भेदभाव नहीं किया. मराठों को आरक्षण में उनका हक दिया गया और ओबीसी कोटे को छुआ तक नहीं गया."
उन्होंने पूछा, "हमारे राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी असहज क्यों हैं?" गणेश उत्सव के आखिरी दिन, 6 सितंबर को, सिर्फ़ फडणवीस को लेकर पूरे पन्ने के अख़बारों में विज्ञापन प्रकाशित हुए, जिससे राजनीतिक हलकों में काफ़ी उत्सुकता पैदा हुई क्योंकि उस व्यक्ति या समूह का कोई ज़िक्र नहीं था जिसने इसे प्रायोजित किया था. यह पूछे जाने पर कि क्या विज्ञापन यह दर्शाता है कि वह अपने रास्ते में बिल्कुल अकेले हैं, मुख्यमंत्री ने कहा कि वह कभी अकेले नहीं होते और उनके साथ भाजपा की ढाल है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि वह चुनौतियों से भागते नहीं हैं और उनका डटकर सामना करते हैं. उन्होंने कहा, "अगर कुछ दिन पहले मराठा आरक्षण का मुद्दा एक चुनौती था, तो अब भारी बारिश और बाढ़ एक चुनौती है. यही शासन और लोकतंत्र की खूबसूरती है. राजनीति में कोई भी मुद्दा हमेशा के लिए सुलझ नहीं जाता."
फडणवीस ने यह भी कहा कि ओबीसी आरक्षण में नॉन-क्रीमी लेयर की तरह, अनुसूचित जाति (एससी) में भी उप-वर्गीकरण होगा. उन्होंने कहा, "इस पर काम करने के लिए एक समिति गठित की गई है." अपने गठबंधन सहयोगियों और उप-मुख्यमंत्रियों एकनाथ शिंदे और अजित पवार का ज़िक्र करते हुए, फडणवीस ने कहा कि वे तीनों अनुभवी नेता हैं और गठबंधन की राजनीति की सीमाओं को समझते हैं.
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