Updated on: 03 April, 2025 06:36 PM IST | Mumbai
Hindi Mid-day Online Correspondent
इस कदम का उद्देश्य 2023 में मौजूद उस व्यवस्था को पुनर्जीवित करना है, जिसमें फाइलों की जांच तत्कालीन दो उपमुख्यमंत्रियों - अजित पवार और फडणवीस द्वारा की जाती थी.
एकनाथ शिंदे. फ़ाइल चित्र
महाराष्ट्र सरकार ने आदेश दिया है कि सभी फाइलें अब उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के पास जाएंगी और फिर मंजूरी के लिए सीएम देवेंद्र फडणवीस के पास भेजी जाएंगी. राज्य की मुख्य सचिव सुजाता सौनिक ने 18 मार्च को इस आशय का आदेश जारी किया. एक न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार इस कदम का उद्देश्य 2023 में मौजूद उस व्यवस्था को पुनर्जीवित करना है, जिसमें फाइलों की जांच तत्कालीन दो उपमुख्यमंत्रियों - अजित पवार और फडणवीस द्वारा की जाती थी और फिर उन्हें तत्कालीन सीएम शिंदे के पास भेजा जाता था.
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रिपोर्ट के मुताबिक आदेश के अनुसार, "26 जुलाई, 2023 से फाइलें उपमुख्यमंत्री अजित पवार, जिनके पास वित्त विभाग है, से (तत्कालीन) उपमुख्यमंत्री फडणवीस के पास भेजी जाती थीं, जिनके पास गृह, कानून और न्यायपालिका विभाग थे और फिर उन्हें (तत्कालीन) सीएम शिंदे के पास मंजूरी के लिए भेजा जाता था." यह व्यवस्था तब की गई थी जब पवार, जो उस समय राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता थे, 2 जुलाई, 2023 को कई एनसीपी विधायकों के साथ शिंदे के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल हो गए थे.
अब, पिछले साल राज्य चुनावों में महायुति (जिसमें भाजपा, शिंदे की शिवसेना और पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी शामिल है) की जीत के बाद फडणवीस के मुख्यमंत्री बनने के बाद, व्यवस्था बदल दी गई है. रिपोर्ट के अनुसार सभी फाइलें डिप्टी सीएम अजित पवार, जो वित्त विभाग संभाल रहे हैं, से एकनाथ शिंदे के पास भेजी जाएंगी, जो डिप्टी सीएम भी हैं और आवास और शहरी विकास विभाग भी संभाल रहे हैं.
नवीनतम आदेश के अनुसार, शिंदे की मंजूरी के बाद फाइलें फडणवीस को भेजी जाएंगी. रिपोर्ट के मुताबिक महायुति शासन ने नवंबर 2024 में 288 सदस्यीय राज्य विधानसभा के चुनावों में भारी जीत दर्ज की और पिछले साल दिसंबर में फिर से सरकार बनाई. भाजपा को 132 सीटें, शिवसेना को 57 और एनसीपी को 41 सीटें मिलने के बाद फडणवीस सीएम बने.
महायुति 2.0 के सत्ता में आने के बाद से शिंदे और फडणवीस के बीच "शीत युद्ध" की अटकलें लगाई जा रही हैं. दोनों नेताओं ने इन अटकलों का जोरदार खंडन किया है. कुछ जिलों के संरक्षक मंत्री पदों को लेकर मतभेद रहे हैं. शिंदे की आपत्तियों के बाद फडणवीस को नासिक और रायगढ़ जिलों के संरक्षक मंत्रियों की नियुक्ति पर अपना फैसला वापस लेना पड़ा.
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