दही हांडी की मुंबई में मची है धूम. (फोटो/अतुल कांबले)
त्योहार के दौरान, `गोविंदा` या दही हांडी प्रतिभागी हवा में लटकी `दही हांडी` (दही से भरे मिट्टी के बर्तन) को तोड़ने के लिए बहु-स्तरीय मानव पिरामिड बनाते हैं.
कान्हा की टोली आज मुंबई में मटकी फोड़ने के लिए पूरे उत्साह से दही हांडी में शामिल हुई.
इस बार दादर में दिव्यांग गोविंदा भी पीछे नहीं रहे. सभी पूरे उत्साह और जोश से दही हांडी में शामिल हो गए.
दही हांडी के इस कार्यक्रम में महिलाएं भी पीछे नहीं रहती हैं. इस कार्यक्रम में शामिल होने वाले सभी प्रतिभागियों को गोविंदा ही कहा जाता है.
रंग-बिरंगे परिधान पहने गोविंदा ट्रकों, टेम्पो, बसों और दोपहिया वाहनों में सवार होकर दही हांडी तोड़ने के लिए महानगर के विभिन्न हिस्सों में घूमते नजर आते हैं.
दही हांडी को एक त्योहार और भगवान कृष्ण की एक लीला के तौर पर मनाया जाता है. प्राचीन कथाओं की मानें तो भगवान कृष्ण भी इसी प्रकार लीला दिखाकर लोगों के घर से माखन और दही चुरा कर खा लेते थे. इसमें सभी ग्वाले शामिल होते थे. इसी तरह से आज भी सभी गोविंदा एक साथ मिलकर दही से भरी हांडी फोड़ते हैं.
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