Pic/Ashish Raje
भक्त अपने-अपने गणेश प्रतिमाओं को सजाकर, फूलों और मालाओं से अलंकृत कर विसर्जन स्थल तक लेकर आए.
कहीं पारंपरिक ढोल-ताशों की थाप गूंज रही थी तो कहीं बैंड-बाजों के साथ भक्तगण नाचते-गाते बप्पा को विदा कर रहे थे. बारिश की बूंदों और भक्तों के आंसुओं ने मानो मिलकर बप्पा को भावभीनी विदाई दी.
इस साल दादर चौपाटी पर इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमाओं की संख्या भी बढ़ी है. कई भक्तगणों ने शादू मिट्टी और प्राकृतिक रंगों से बनी प्रतिमाओं का विसर्जन किया ताकि समुद्री प्रदूषण कम हो.
बीएमसी और पुलिस प्रशासन ने भी विशेष इंतज़ाम किए थे. समुद्र किनारे सुरक्षा बढ़ाई गई और एनडीआरएफ की टीम भी मौके पर मौजूद रही.
कई श्रद्धालुओं ने कहा कि डेढ़ दिन का गणेशोत्सव भले ही छोटा हो, लेकिन आस्था और आनंद में कोई कमी नहीं रहती. “बप्पा घर में आते हैं तो माहौल पूरी तरह बदल जाता है. अब जब उन्हें विदा कर रहे हैं तो मन भावुक है, लेकिन विश्वास है कि वे अगले साल और सुख-समृद्धि लेकर लौटेंगे,” एक भक्त ने कहा.
विसर्जन के चलते मुंबई पुलिस ने दादर, शिवाजी पार्क और आसपास के इलाकों में विशेष ट्रैफिक व्यवस्था की. बीएमसी के कर्मचारियों ने चौपाटी और सड़कों पर सफाई की जिम्मेदारी निभाई. इस दौरान कई सामाजिक संस्थाएं भी सक्रिय रहीं और श्रद्धालुओं को पानी व चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई.
शाम ढलते ही जब ढोल-ताशों की गूंज के बीच प्रतिमाओं को समुद्र की लहरों के हवाले किया गया, तो वातावरण गमगीन लेकिन आशा से भरा नजर आया. भक्तों ने folded hands के साथ बप्पा से अगले साल जल्दी आने की प्रार्थना की.
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